नोटबंदी के बाद शहरों के साथ गांवों को भी कैशलेस बनाने की बात चली थी। ऐसे में केरल के मलप्पुरम को देश का पहला कैशलेस आदिवासियों का गांव घोषित किया गया वहीं साथ ही राजस्थान के नया गांव को भी कैशलेस घोषित किया जा चुका है। लेकिन दोनों गांवों की असलियत कुछ और ही है। हमारे सहयोगी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक 27 दिसंबर को मलप्पुरम के
कलैक्टर अमित मीना ने 27 लोगों के खाते में 5-5 रुपए डालकर जिले को कैशलेस घोषित कर दिया था। हालांकि ये ट्रांज़ेक्शन कुछ ही दिनों में बंद हो गया। जिले के कुछ लोगों को वाई-फाई दिया गया था जिससे वे लोग SBI के SBI Buddy ऐप से पेमेंट कर सकें। लेकिन ये कुछ लोगों तक सीमित है और बिजली की उचित व्यवस्था न होने के कारण वाई-फाई सही तरीके से काम नहीं करता। वहीं एक अंग्रेज़ी अखबार के मुताबिक राजस्थान के नया गांव में तो इंटरनेट कनेक्टिविटी ही नहीं है लेकिन कागज़ों में कहा गया है िक गांव में 5 PoS मशीनें लगाई गई हैं और सभी स्मार्ट फोन्स में बैंकों के ऐप डाल दिए गए हैं। लेकिन अभी भी लोगों को पैसे निकालने के लिए तीन किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता है। गांववालों के पास एटीएम, रूपे कार्ड तो हैं लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं है। दरअसल नोटबंदी के बाद पीएम मोदी ने कैशलेस होने को कहा है जिसके बाद राज्यों में सबसे पहले कैशलेस बनने की होड़ लग गई लेकिन जो गांव कैशलेस होने का दावा कर रहे हैं उनमें तो शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।
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