इनमें से बहुत सारे पथराव करने वाले, 12 से 15 वर्ष की आयु समूह के हैं, जो कि अपनी गल्ती के परिणामों से बिल्कुल अंजान हैं। ये गुमराह बच्चे अलगाववादियों द्वारा उत्तेजित किए जा रहे हैं िजनके परिवार के सदस्य देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में रह रहे हैं। कश्मीर घाटी के निवासियों ने अब अपने बच्चों को शिकार बनाने के लिए कश्मीरी अलगाववादियों की मंशा पर सवाल उठाया
है। साल 2008 से पथराव करना श्रीनगर में सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों की एक नियमित विशेषता बन गई है। प्रदर्शनकारी पुलिस और सुरक्षा बलों पर पथराव करते हैं और बच्चों को अपनी ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं। छोटे बच्चों को पथराव में संलग्न करते हुए, अलगाववादी उन्हें अपराधी बनने के लिए तैयार कर रहे हैं। कश्मीर घाटी के लोगों को अलगाववादी नेताओं और अन्य गुंडों के नापाक इरादों का अहसास होना चाहिए जो कि बच्चों को पथराव करने के लिए उत्तेजित कर रहे हैं। युवाओं के जीवन जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अनमोल हैं।
… और पढ़ें