लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को केंद्र सरकार द्वारा नया सेना अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर एक तरफ कांग्रेस और वाम दलों ने सवाल उठाए, वहीं सरकार ने इसका जवाब दिया। कांग्रेस ने कहा कि नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया। वहीं केंद्र सरकार ने इस आलोचना का जवाब देेते हुए कहा कि रावत कि नियुक्ति का निर्णय पूरी तरह योग्यता के आधार पर लिया गया है और
नियुक्ति सुरक्षा हालातों और आवश्यकताओं के आधार पर की गई है। रक्षा मंत्रालयों की ओर से कहा गया कि सेना अध्यक्ष की नियुक्ति सेना कमांडर रैंक के अधिकारियों के एक पैनल में से की गई है। सेना कमांडरों के रैंक के अधिकारियों के पैनल में सभी अधिकारी सक्षम हैं और सर्वाधिक योग्य का चयन किया गया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वर्तमान सुरक्षा स्थिति में, आतंकवाद का मुकाबला करने और आतंकवाद विरोधी मुद्दे प्रमुख हैं और इसी के आधार पर नए सेना अध्यक्ष का चयन किया गया है। वहीं बिपिन रावत के नए सेना अध्यक्ष चुने जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए कि पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ हैं और अगले सबसे वरिष्ठ दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरीज हैं, उन्हें सेना अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया।
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