हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति पर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने, कोर्ट ने पूछा- ‘क्या सरकार न्यायपालिका को बंद करना चाहती है’

हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपनी तरफ से भेजे गए नामों के मंज़ूर न होने पर सरकार से सफाई मांगी है और कहा कि सरकार न्यायपालिका के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर रही है। कोर्ट ने कहा िक अगर

न्यायिक नियुक्तियों को तेज़ नहीं किया गया तो वह पीएमओ के सचिवों और न्यायिक विभागों को समन भेजेगी। पिछले 9 महीनों में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भेजे गए 77 नामों में सिर्फ 18 को मंज़ूरी मिली है। इस पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि 9 महीने से कॉलेजियम की तरफ से भेजे गए नामों पर सरकार बैठी है। वह सरकार को सिस्टम खराब करने नहीं दे सकते। अगर किसी वजह से दिक्कत है तो सिफारिशों को दोबारा विचार के लिए कॉलेजियम के पास भेजना चाहिए था। चीफ जस्टिस ने कहा कि देश के हाई कोर्ट जजों की लगभग 60 फीसदी संख्या पर काम कर रहे हैं। कोर्ट रूम लॉक रखने पड़ रहे हैं। क्या सरकार न्यायपालिका को बंद करना चाहती है। सरकार की तरफ से पेश एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी की दलील थी कि सरकार लगातार नामों की समीक्षा कर उन्हें मंज़ूरी दे रही है। हालांकि, चीफ जस्टिस ने इन दलीलों को मानने से मना कर दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।

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