उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता जानना मतदाता का मौलिक अधिकार; गलत जानकारी देने पर रद्द होगा चुनाव

चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए अब अपनी शैक्षणिक योग्यता छिपाना या गलत जानकारी देना खतरे की घंटी बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मतदाता को चुनाव में उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता के बारे में जानने का बुनियादी अधिकार है और ऐसे में चुनावी हलफनामे में झूठी जानकारी देने पर निर्वाचन भी रद्द किया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों और फार्म

26 में भी स्पष्ट है कि यह प्रत्याशी का कर्तव्य है कि वह अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में सही जानकारी दे। अदालत ने ये भी व्यवस्था दी कि अगर चुनाव में दो प्रत्याशी हैं और यह साबित हो सकता है कि विजयी उम्मीदवार का नामांकन पत्र गलत तरीके से स्वीकार किया गया है तो चुनाव हारने वाले प्रत्याशी के लिए ऐसा सबूत पेश करने की ज़रूरत नहीं है कि चुनाव वास्तव में प्रभावित हुआ है। मणिपुर के कांग्रेस MLA एम विश्वनाथ के खिलाफ एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह बात कही। विश्वनाथ ने 2012 में विधानसभा चुनाव में अपनी शैक्षणिक योग्यता में खुद को MBA बताया था। जिसके बाद उनका निर्वाचन निरस्त कर दिया गया था। कोर्ट ने यह भी पाया कि उम्मीदवार ने 2008 के चुनावों में भी गलत जानकारी दी थी।

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