The RTI FILES EP 1: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 ने RTI- और प्रेस फ्रीडम को कैसे जकड़ा ?

आलोचक इसे Article 19(1)(a) के तहत बोलने और जानने के अधिकार पर खतरा मानते हैं, जबकि सरकार का दावा है कि यह निजता और पारदर्शिता में संतुलन बनाता है। कुल मिलाकर, ये नियम राज्य को मजबूत बनाते हैं, लेकिन नागरिकों और मीडिया की जवाबदेही की क्षमता कमजोर करते हैं…. देखिये हमारा नया शो द आरटीआई फाइल्स

Digital Data Protection Act Explained: 14 नवंबर 2025 को भारत सरकार ने Digital Personal Data Protection (DPDP) Rules, 2025 को अधिसूचित किया, जो DPDP Act, 2023 को लागू करता है। ये नियम निजता की रक्षा का दावा करते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गहरा प्रहार हुआ है। सबसे बड़ा बदलाव RTI Act की धारा 8(1)(j) में है, जहां पहले ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ के आधार

पर व्यक्तिगत जानकारी जारी की जा सकती थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह छूट मिल गई है—बिना पब्लिक इंटरेस्ट टेस्ट के व्यक्तिगत जानकारी देने से इनकार आसान हो गया। इससे पुलों के ठेकेदारों जैसे मामलों में भ्रष्टाचार उजागर करना मुश्किल। Rule 23 सरकार को बिना नोटिस या जज की मंजूरी के व्यक्तिगत डेटा (कॉल लॉग, लोकेशन आदि) मांगने की व्यापक शक्ति देता है, जो ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के नाम पर हो सकता है। पत्रकारों के लिए कोई स्पष्ट छूट नहीं है—वे भी ‘डेटा फिड्यूशियरी’ माने जाते हैं, जिससे संवेदनशील जानकारी या व्हिसलब्लोअर डेटा इस्तेमाल करने के लिए सहमति लेनी पड़ेगी, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। Editors Guild of India और अन्य संगठनों ने इसे प्रेस फ्रीडम पर हमला बताया, जो जांच-पत्रकारिता को बाधित कर सकता है।

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