भारतीयों का सोने के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। यही वजह है कि देश में अधिकतर लोगों के पास सोने के आभूषण होना एक सामान्य बात मानी जाती है। अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक स्कीम के तहत आप अपने इस सोने से कमाई भी कर सकते हैं। दरअसल स्टेट बैंक ने रिवैम्पड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम (R-GDS) पेश की है। इस स्कीम के तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा कर उस पर ब्याज पा सकते हैं। इससे ना सिर्फ लोगों के सोने के आभूषण व अन्य चीजें सुरक्षित रहेंगी बल्कि उन पर ब्याज की रकम से कमाई भी होगी।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इस स्कीम का मकसद देश के सोने को प्रोडक्टिव इस्तेमाल में लाना है। बता दें कि ग्राहक इस स्कीम के तहत सोने की छड़, सोने के सिक्के, आभूषण आदि चीजें बैंक में जमा कर सकते हैं। सोने को बैंक में जमा करने के दौरान ग्राहकों को एक एप्लीकेशन फॉर्म भरना होगा, जिसके साथ एक आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ और इन्वेंट्री फॉर्म भी भरना होगा।
इन तरीकों से कर सकते हैं जमाः एसबीआई की R-GDS स्कीम के तहत लोग तीन तरीकों से अपना सोना बैंक में जमा कर सकते हैं। इसमें पहला है शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD), मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (MTGD) और लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (LTGD)
शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट के तहत लोग अपना सोना 1 साल से लेकर 3 साल तक के लिए बैंक में जमा कर सकते हैं।
मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट के तहत लोग 5 से 7 साल के लिए अपना सोना बैंक में जमा कर सकते हैं। इस स्कीम में सोना केन्द्र सरकार की ओर से बैंक द्वारा जमा किया जाएगा।
लॉन्ग टर्म डिपॉजिट में 12-15 साल के लिए सोना बैंक में जमा कराया जा सकेगा। यहां भी केन्द्र सरकार की ओर से बैंक द्वारा सोना जमा किया जाएगा।
कौन लोग कर सकते हैं सोना बैंक में जमाः इस स्कीम के तहत कोई भी सिंगल या मिश्रित तौर पर सोना बैंक में जमा कर सकता है। साथ ही प्रोपराइटरशिप और पार्टनशिप फर्म, हिंदू संयुक्त परिवार, म्यूचुअल फंड/एक्सचेंड ट्रेडेड फंड्स आदि की ट्रस्ट (सेबी द्वारा रजिस्टर्ड) और कंपनियां अपना सोना बैंक में जमा कर सकती हैं।
कितना सोना जमा कर सकते हैं बैंक में: R-GDS स्कीम के तहत लोग कम से कम 30 ग्राम सोना बैंक में जमा कर उस पर ब्याज पा सकते हैं। वहीं इस योजना में सोना जमा करने की अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है।
जानें कितना मिलेगा ब्याजः सोना जमा करने पर लोगों को बैंक द्वारा निम्न दरों के हिसाब से ब्याज दिया जाता है।
