कर्मचारी भविष्यि निधि संगठन (ईपीएफओ) ने मेडिकल इमरजेंसी के दौरान 1 लाख रुपये तक की राशि निकलाने के लिए नई सर्विस शुरू की है। ईपीएफओ सदस्य मेडिकल इमरजेंसी और हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान 1 लाख रुपये का एडवांस आसानी से हासिल कर सकते हैं। इसमें कोविड-19 जैसी बीमारी को भी शामिल किया गया है। कर्मचारी या परिवार के किसी सदस्य को फंड के लिए हॉस्पिटल और मरीज की डिटेल के साथ आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
हालांकि ईपीएफओ इससे पहले भी मेडिकल एडवांस की सुविधा देता है लेकिन कोविड के चलते नई सर्विस शुरू कर कर्मचारियों को राहत दी है। पहले मेडिकल एडवांस तभी मिलता था जब हॉस्पिटल द्वारा अनुमानित बिल (Estimated Bill) जारी किया जाता था है पर अब बिना किसी दस्तावेज के एडवांस निकाजा जा सकता है। पहले ईपीएफओ सदस्य को मेडिकल बिल जमा करने के बाद यह पैसाल मिलता था।
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने 1 जून को इसको लेकर एक सर्कुलर जारी किया है। ईपीएफओ ने कहा कि जानलेवा बीमारियों के मामले में, अपनी जान बचाने के लिए रोगी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना अनिवार्य हो जाता है और ऐसी गंभीर स्थितियों में अस्पताल से अनुमानित बिल हासिल करना संभव नहीं है। ऐसे में अब बिना किसी दस्तावेज के फंड दिया जा जा सकता है।
ऐसे उठाएं इस सर्विस का फायदा:-
– ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट epfindia.gov.in पर जाएं
– अपने खाते में लॉग इन करने के लिए अपना यूएएन, पासवर्ड और कैप्चा विवरण दर्ज करें
– अब ‘ऑनलाइन सर्विस’ टैब पर नेविगेट करें, और ‘क्लेम (फॉर्म-31, 19,10सी और 10डी)’ विकल्प पर क्लिक करें
– एक नया पेज खुलेगा, जहां यूएएन से जुड़ी अपने बैंक खाते की जानकारी को वेरिफाई करना होगा इस दौरान सभी नियमों और शर्तों को पढ़ें और Accept पर क्लिक कर दें।
– इसके बाद ‘Proceed for Online Claim’ पर क्लिक करें और निकासी के लिए आवेदन करने वाले विकल्पों में से ‘Medical emergency’ को चुनें।
बता दें कि मेडिकल एडवांस सर्विस का लाभ सीएस(एमए) रूल्स के तहत आने वाले कर्मचारियों और केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों द्वारा ही किया जा सकता है।
यह सुविधा आम तौर पर बीमारी के इलाज के लिए सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई (पीएसयू) या सीजीएचएस-सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए उपलब्ध है। हालांकि, यदि रोगी को किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है तो ईपीएफओ के सक्षम प्राधिकारी द्वारा पूरे मेडिकल इमरजेंसी का आकलन किया जाएगा ताकि यह तय किया जा सके कि मेडिकल एडवांस करने की आवश्यकता है या नहीं।
