उत्तर प्रदेश में कोरोना काल के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को योगी सरकार ने 10 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की है। शनिवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों के परिजनों को सहायता राशि का वितरण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब जानते हैं कि पिछले 15 – 16 महीने में पूरा देश, पूरी दुनिया इस सदी की सबसे बड़ी महामारी से जूझ रहा है। हर तबका इस बीमारी से प्रभावित हुआ है।

सीएम योगी के इस कार्यक्रम पर लोग सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देने वाले लोगों का कहना है कि सरकार ने इस भावुक पल को भी एक इवेंट में बदल दिया। पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा कि आक्सीजन और इलाज के अभाव में पत्रकारों को मरने के लिए छोड़ा, समय पर उन्हें वैक्सीनेट ना कर उनकी जान जोखिम में डाल दी, दिवंगत पत्रकार के परिजनों को मिलने वाली सरकारी सहायता 20 लाख से घटा कर 10 लाख कर दी…पर चेक के बड़े प्रिंटआउट निकाल कर फोटोसेशन करवाए गए, इन्हें धन्यवाद कहिए।

एक टि्वटर हैंडल से कमेंट करते हुए लिखा गया कि अरे बेशर्मो ये विधवाएं व माताएं हैं किसी ने पति तो किसी ने बेटे को खोया है और आप सहानुभूति के सहारे इवेंट बनाकर इनको भी भुनाने लगे? @samirkapoor1971 अकाउंट से इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा गया कि मौत का मुआवज़ा भी इवेंट है…. कोरोना से मरे पत्रकारों के परिवारों को चेक ऐसे जैसे क्रिकेट के मैच में मैन ऑफ़ द मैच को दिये जाते है।

@pathakalok68 टि्वटर हैंडल से लिखा गया कि कुछ पत्रकार कल से तेल लगा रहे हैं योगी जी को की उन्होंने करोना काल में दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को दस लाख रूपए देने की घोषणा कर दी है। जो पैसा योगी सरकार दे रही है वो जनता का पैसा है। सरकार की जिम्मेदारी है की महामारी से मरने वालो के परिवार को मदद दे ,योगी एहसान नही कर है। स्वतंत्र पत्रकार रणविजय सिंह ने इस कार्यक्रम की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि अच्छा हुआ 20-25 लाख के चेक नहीं थे, वरना हॉल में रखने की जगह न बचती। जितनी बड़ी राशि उतना बड़ा चेक।

@bhagha_ziddi टि्वटर अकाउंट से कमेंट किया गया कि कोरोना में जान गवाने वाले पत्रकारों के लिए UP सरकार ने 10-10 लाख का मुआवज़ा दिया है। ये अच्छी पहल है लेकिन मुआवज़ा दिए जाने को भी इवेंट बना दिया गया है। ऐसे लग रहा है जैसे इंडियन आइडियल के बच्चों को बड़े पोस्टर पकड़ा दिए हों। सरकार को समझना चाहिए हर चीज़ प्रचार के लिए नहीं होती। @Editor__Sanjay टि्वटर अकाउंट से इस कार्यक्रम की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा गया है कि यह उन पत्रकारों के परिवार है जो कोरोना से मरे थे। दस लाख रुपये के चैक की फ़ोटो इस तरह रखना कितना ओछा लगता है। सपा सरकार में किसी भी पत्रकार की मौत पर बीस लाख मिलते थे पर उसका भी इस तरह फ़ोटो से़शन कराना कभी नहीं देखा। यहॉ दस लाख देकर उसका भी क्रेडिट इस तरह लिया जा रहा है।