संसद में आम बजट 2017-18 पेश होने के बाद गुरुवार को उसपर चर्चा हुई। विपक्ष की जिरह के बाद जब सत्‍ता पक्ष की ओर से बात रखने की बारी आई तो बीजेपी ने एक बार फिर बिहार से सांसद हुकुमदेव नारायण यादव को मौका दिया। हुकुमदेव ने 2015-16 के बजट पर चर्चा में भी सरकार का पक्ष रखा था। कांग्रेसी नेता वीरप्‍पा मोइली के बाद अपनी बात कहने उठे हुकुमदेव ने भाषण की शुरुआत में ही उनपर तंज कसा। उन्‍होंने कहा, ”संयोग कुछ ऐसा है कि जब कभी उधर से मोइली जी बोलते हैं, तो ठीक उनके बाद मुझे बोलने का अवसर मिलता है। वे जब बोल रहे थे तो पता नहीं अंग्रेजी के कौन-कौन से शब्‍दों का प्रयोग कर रहे थे। मैं उतनी अंग्रेजी नहीं समझता, लेकिन उनका भाव समझ रहा था। हिंदुस्‍तान में दो हिंदुस्‍तान है, वीरप्‍पा मोइली जी, आप इंडिया से बोल रहे थे, और मैं भारत से बोलता हूं। मेरी बात भारत में यूपी, बिहार, मध्‍य प्रदेश, झारखंड के करोड़ों लोगों को समझ आती है।”

हुकुमदेव ने पूरे भाषण में कांग्रेस को निशाने पर रखा। उन्‍होंने कहा, ”मैं जिस समय अपनी मां के पेट में था, उस समय मां को अगर दही, दूध, मांस, मछली, अंडा, ड्राईफ्रूट आदि भरपेट खाने को मिला होता तो शायद आज मेरा रंग-रूप दूसरा हो गया होता।” यादव ने कांग्रेस द्वारा आंकड़े रखे जाने पर चुटकी लेते हुए पूछा, ”मोइली जी, आप इतने आंकड़े देते हैं। हरियाणा का किसान कहता है, हिसाब यूं का यूं, बता कुनबा डूबा क्‍यूं? सब हिसाब तो ठीक है लेकिन हिंदुस्‍तान की अमीरी-गरीबी में फर्क क्‍यों हुआ?”

जब कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने यादव को याद दिलाया कि वह पहले दूसरी पार्टी में थे, तो उन्‍होंने खड़गे की तरफ रुख करते हुए कहा, ” मैं 1950 का समाजसेवक रहा, समाजवादी आंदोलन में रहा, लेकिन मेरे गुरु ने सिखाया कि कठपुतली के जैसे नाचना मत। आप जिस जमात में रहे हो, उस जमात में पिछड़ों को, दलितों को नेता बनाया गया, लेकिन उनको कठपुतली के जैसे नचाया गया, उनके स्‍वाभिमान की रक्षा नहीं हुई। मैं जिस निर्भीकता के साथ अपनी पार्टी की तरफ से बोल रहा हूं, क्‍या आप वैसे ही बोल सकते हैं?” हुकुमदेव लगातार खड़गे की तरफ मुखातिब  थे तो कार्यकारी स्‍पीकर डॉ रत्‍ना डे ने उनसे कहा कि चेयर की तरफ देंखें।

बजट में किसानों के लिए किए गए प्रावधानों की बात करते हुए यादव ने कहा, ”जमीन में लगातार खाद पर खाद डालते चले गए, इसमें समय लगेगा कौशलेंद्र (कांग्रेस सांसद) जी, चट मंगनी पट ब्‍याह नहीं होता है। आप लोग तो ऐसे ही सोचते हैं।” हुकुमदेव ने भाजपा के सत्‍ता तक पहुंचने के संघर्ष का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ”आखिर आपने क्‍या किया जो 400 सीट वाले 44 पर आ गए। इस पर सोचिए आप। हम कहां 2 पर थे, आते-आते 280 पर पहुंच गए। हममें कुछ काबिलियत होगी, लोगों ने विश्‍वास किया होगा। वोट लूट कर नहीं आए, बंदूक के बल पर नहीं आए। आज भी भारत के लोगों का हमपर विश्‍वास है। किसान की बात बहुत किए, नोटबंदी पर चर्चा बहुत किए, ये नोटबंदी है कि हरि कीर्तन है। जब कुछ न मिले तो इसी पर शुरू हो जाओ।”

2015-16 के बजट पर चर्चा के दौरान हुकुमदेव का मशहूर भाषण: 

महंगाई पर संसद में चर्चा के दौरान हुकुम नारायण यादव का यह अंदाज देखिए:

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