दरगाह आला हजरत स्थित सुन्नी मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूकी के एक बयान पर सोशल मीडिया में हंगामा बरपा है। मुफ्ती ने बयान दिया कि, ‘इस्लाम में अल्कोहल को हराम करार दिया गया है। इसलिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल मस्जिदों में ना किया जाए। मस्जिद अल्लाह का घर है उसे नापाक ना होने दें।’ मुफ्ती के इस बयान की सोशल मीडिया में कड़ी निंदा हो रही है। खुद इस्लाम को मानने वाले भी इस बयान को वाहियात बताते हुए मुफ्ती को ट्रोल कर रहे हैं।
दरअसल 8 जून से धार्मिक स्थलों को खोले की मंजूरी दी गई थी। सरकार की तरफ से अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से धार्मिक स्थलों को सैनिटाइज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस पर दारुल इफ्ता के मुफ्ती नश्तर फारूकी ने आपत्ति जताते हुए बयान जारी किया कि अल्कोहल से बने सैनिटाइजर का इस्तेमाल मुसलमानों के लिए हराम है और उससे मस्जिदों को सैनिटाइज करने का मतलब पूरी मस्जिद को नापाक करना है। नापाक जगह पर नमाज नहीं हो सकती।
मुफ्ती के इस बयान पर लोगों ने लिखा कि अल्कोहल मतलब शराब नहीं होता। तमाम तरह के केमिकल्स में अल्कोहल होता है। ऐसे में इस तरह की बातें करना बेवकूफी है। वहीं कुछ मुसलमान यूजर्स ने मुफ्ती के बयान पर आपत्ति जताते हुए लिखा- जिस सैनिटाइज़र से दुनिया भर के तमाम इस्लामिक मुल्क़ों में मस्जिदों को सैनेटाइज़ किया जा रहा है वह क्या है? यूं जाहिलियत का प्रदर्शन मत कीजिए। रास्ता सुझाइए कि क्या किया जाए, हमेशा ‘क्या नहीं करना है’ वाले आदेश बंद कीजिए।
यूजर्स ने मुफ्ती को आईना दिखआ ते हुए ये भी लिखा कि मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थान काबा को तो लगातार सैनेटाइज़ किया जा रहा है। और हां, एल्कोहल युक्त सैनेटाइज़र पीने की बात नहीं हो रही है। खुद को सुरक्षित रखने हेतु इसका इस्तेमाल करने की बात हो रही है।
बता दें कि इसी तरह की खबर मध्य प्रदेश के भोपाल से भी हाल में ऐसी ही खबर आई थी।वहां मां दुर्गा धाम मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर तिवारी ने सैनिटाइजर को लेकर आपत्ति जाहिर की थी। पुजारी ने कहा था कि किसी को भी सैनिटाइजर लगाकर मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जा सकता है, क्योंकि सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है।
