उपहार हादसे में दिल्ली की एक अदालत ने सबूतों से छेड़छाड़ करने के मामले में सुशील और गोपाल अंसल को सात साल कैद की सजा सुनाई। अदालत के पूर्व कर्मी दिनेश चंद शर्मा के साथ दो अन्य लोगों पीपी बत्रा और अनूप सिंह को भी इस मामले में सात-सात साल कैद की सजा सुनाई। दिल्ली की अदालत ने अंसल बंधुओं में से प्रत्येक पर 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।

चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने कहा कि कई रातें सोचने के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अंसल बंधु सजा के पात्र हैं। आदेश सुनाए जाने के बाद जमानत पर छूटे दोषियों को हिरासत में ले लिया गया। अदालत के पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा और दो अन्य लोगों पीपी बत्रा और अनूप सिंह पर भी तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। साक्ष्यों से छेड़छाड़ के मामले में तीनों पर अंसल बंधुओं के लिए जालसाजी करने का आरोप है। ध्यान रहे कि 13 जून, 1997 को हिंदी फिल्म ‘बॉर्डर’ की स्क्रीनिंग के दौरान उपहार सिनेमा में आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह केस उनके कैरियर का सबसे बड़ा केस है। अपने फैसले में उन्होंने कहा कि आरोपियों ने ट्रायल के दौरान कई संवेदनशील दस्तावेजों को नष्ट किया, जिससे उनकी मिलीभगत का पता चलता था। उन्होंने न्यायिक तंत्र को भी निशाना बनाने से गुरेज नहीं किया। सजा से बचने के लिए उन्होंने यह गैरकानूनी हरकत की। उनकी करतूत से साफ है कि वो अदालतों को कुछ नहीं समझ रहे थे।

कोर्ट ने कहा कि अंसल बंधु समझ रहे थे कि इस तरह की हरकतें करके सजा से बच जाएंगे। उनका कृत्य दुनिया के सामने आ चुका है। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट की हिदायतों पर दाखिल किया गया था। AVUT की चेयरपर्सन नीलम कृष्णमूर्ति की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला लिया था। साक्ष्यों से छेड़छाड़ पहली बार 20 जुलाई 2002 को सामने आई। उसके बाद दिनेश चंद्र शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। 25 जून 2004 को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।