कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला के नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर साम्‍प्रदायिक भेदभाव का आरोप सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आया। पूनावाला ने ट्वीट कर कहा था कि पीएम मोदी लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्‍मद अली हरीज को पहला मुस्लिम जनरल नहीं बनाना चाहते थे, इसलिए दो वरिष्‍ठ सैन्‍य अधिकारियों की अनदेखी की गई। उन्‍होंने लिखा था, ”अगर मोदी बिपिन रावत को बिना बारी के आर्मी चीफ नहीं बनाते तो हरीज लेफ्टिनेंट बक्‍शी के कार्यकाल के बाद सेना के पहले मुस्लिम प्रमुख होते। लेकिन मोदी ऐसा नहीं चाहते थे।” एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने लिखा कि शायद आरएसएस मानसिकता के चलते मोदी सरकार किसी अल्‍पसंख्‍यक के सेना प्रमुख बनने को सहन नहीं कर सकती थी। गौरतलब है केंद्र सरकार ने 17 दिसंबर को नए थलसेनाध्‍यक्ष के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के नाम का एलान किया था। इसके लिए लेफ्टिनेंट जनरल बक्‍शी और हरीज की दावेदारी की अनदेखी की गई।

पूनावाला के ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा कि सेना केवल भारतीय है। उसमें हिंदू-मुस्लिम नहीं होता है। एक अन्‍य यूजर के अनुसार, ”यदि सीनियरिटी नियम होता तो दिग्विजय सिंह कांग्रेस अध्‍यक्ष बनते ना कि सोनिया गांधी।” इसी तरह के एक ट्वीट में कहा गया, ”सभी चीजों को साम्‍प्रदायिक क्‍यों किया जा रहा है? इस कमेंट से बचा जाना चाहिए था। सेना सबसे धर्मनिरपेक्ष संस्‍थान है।” एक यूजर ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी फूट डालो और राज करो में विश्‍वास करती है। भारत में मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में इस्‍तेमाल किया गया।

https://twitter.com/Shehzad_Ind/status/810174364050038784

https://twitter.com/sribang/status/810482551911391232

https://twitter.com/rekharamaswamy/status/810176938568536064