हमारे जीवन में कई तरह की परेशानियां होती हैं और कई बार हम उनसे जूझने के बजाए हम उनसे हार मान लेते हैं, लेकिन इन पांच हस्तियों की सच्ची कहानी जानकर आपके जिंदगी जीने का नजरिया ही बदल जाएगा। यह कहानियां मिसाल पेश करती हैं कि अगर हौसला बुलंद हो तो फिर कोई भी ताकत आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

 

दीपा मलिक

दीपा मलिक

एक हादसे में दीपा मलिक के पैर लकवे का शिकार हो गए थे लेकिन यह हादसा दीपा मलिक के चट्टान से भी ज्यादा मजबूत इरादों को डिगा नहीं पाया। दीपा मलिक भारत की पहली दिव्यांग महिला बाइक राइडर और कार रैलिस्ट हैं जिनके नाम कई सारे रिकॉर्ड्स हैं। दीपा मलिक इसी साल 2016 रियो पैरालंपिक खेलों में शॉट पुट एफ-53 कैटेगरी में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बनी। दीपा मलिक की कमर से नीचे का हिस्सा एक स्पाईनल ट्यूमर की वजह से डैमेज हो गया था। दीपा मलिक ने उस हादसे के बाद से अपना केटरिंग का कारोबार बंद करके स्पोर्ट्स को अपना लक्ष्य बनाया। इसके अलावा दीपा कई अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं में कुल 39 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रोंज मेडल जीत चुकी हैं और 2012 में राष्ट्रपति द्वारा अर्जुना अवॉर्ड से भी सम्मानित की जा चुकी हैं।

 

अरुणिमा सिन्हा

अरुणिमा सिन्हा

अरुणिमा सिन्हा दुनिया की पहली दिव्यांग महिला पर्वतारोही हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट, माउंट इलब्रोस और किलिमंजारों जैसी ऊंची पर्वतों पर पहुंचकर बड़े रिकॉर्ड्स बनाए हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबाल और फुटबाल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। बहादुरी की मिसाल कायम करने वाली अरुणिमा ने अपना पैर एक ट्रेन हादसे में गंवाया था। अरुणिमा ट्रेन में कुछ चोरों से लड़ते हुए इस हादसे का शिकार हुई थीं। अपना पैर गंवाने के बाद अरुणिमा ने उत्तरकाशी के नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ माऊंटीनियरिंग से अपनी ट्रेनिंग हासिल की।

 

गिरीश शर्मा

गिरीश शर्मा

गिरीश ने अपना एक पैर रेलवे दुर्घटना में दो साल की उम्र में गंवा दिया था। गिरीश के पिता भारतीय रेलवे में काम करते थे और गिरीश दो साल की उम्र में गलती से अपने घर के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए जिसमें उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। मगर गिरीश ने इस हादसे के बाद हार नहीं मानी और खेल के प्रति अपने जुनून को पहचाना। गिरीश प्रोफेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और 16 साल की उम्र से ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं।

 

लक्ष्मी मुखर्जी

लक्ष्मी मुखर्जी

देश में कई महिलाएं बड़ी तादाद में एसिड अटैक की शिकार होती हैं। लक्ष्मी पर 2005 में एक संकी आशिक ने उसपर तेजाब फेंककर उसका चेहरे जला दिया था। इस हादसे से हार न मानते हुए लक्ष्मी ने अपनी जिंदगी में एसिड अटैक के खिलाफ लड़ाई को अपना लक्ष्य बना लिया है और आज वह एक सोशल ऐक्टिविस्ट हैं। लक्ष्मी ने अपना जीवन एसिड अटैक की शिकार बनी महिलाओं की सेवा मे लगा दिया हैं। लक्ष्मी मुखर्जी को प्रतिष्ठित इंटरनेशनल विमेंस करेज अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है जो उन्हें मीशेल ओबामा ने द्वारा 2014 में दिया गया था।

 

गिरीश गोगिया (Source: twitter)

गिरीश गोगिया
मशहूर सागर ड्राइवर गिरीश गोगिया का गरदन से नीचे का हिस्सा लक्वाग्रस्त है। 1999 में गोवा में हुए एक हादसे ने गिरीश की जिंदगी बदल दी और उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आने की वजह से वह लक्वा का शिकार हो गए। मगर गिरीश ने इस हादसे से हार मामने ने इंकार किया और आज वह अपनी जिंदगी के अनुभवों को दूसरों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। वह लोगों को बुरे से बुरे हालात में भी एक खुशहाल जिंदगी जीने के लिए मोटिवेट करते हैं।

यह सच्ची कहानियां इस बात की मिसाल हैं कि अगर हौसला अगर बुलंद हो तो हम कुछ भी कर सकते हैं। इन पांचों को सम्मानित करने के लिए 10वें पॉजिटिव हेल्थ अवॉर्ड्स में लोगों द्वारा इन्हें नोमिनेट किया गया है। यह सम्मान समारोह 23 नवंबर को आयोजित किया जाएगा।

वीडियो: भारत के देवेंद्र झाझरिया ने रियो पैरालंपिक 2016 में गोल्ड मैडल जीता; तोड़ा खुद का रिकॉर्ड