Google Trends: गणतंत्र दिवस 2026 पर कर्तव्य पथ एक बार फिर इतिहास, संस्कृति और वर्तमान पीढ़ी के संगम का साक्षी बनेगा। इस वर्ष संस्कृति मंत्रालय की झांकी का विषय ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ रखा गया है, जो केवल एक झांकी नहीं बल्कि भारत की सभ्यतागत स्मृति का चलता-फिरता दस्तावेज होगी। झांकी में चलते हुए ट्रैक्टर पर वंदे मातरम्’ की मूल पांडुलिपि प्रदर्शित की जाएगी, जो स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक शक्ति को प्रत्यक्ष रूप में सामने लाएगी।
इस झांकी की सबसे खास झलक इसका समकालीन स्वरूप है। झांकी के केंद्र में जेन-जी को दिखाया गया है, जो ‘वंदे मातरम्’ गाते हुए देश की नई पीढ़ी और ऐतिहासिक चेतना के बीच सेतु बनती नजर आएगी। इसके साथ ही भारत के चारों दिशाओं से आए लोक-कलाकार झांकी के पीछे चलते हुए देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता को जीवंत रूप देंगे।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने झांकी के विषय पर कहा कि गणतंत्र दिवस की झांकियां केवल औपचारिक प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र की सभ्यतागत स्मृति के चलते-फिरते अभिलेख होती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय क्रांतिकारियों के होंठों पर गूंजने वाला ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ गीत नहीं था, बल्कि अरबिंदो ने इसमें वह आध्यात्मिक शक्ति देखी थी, जो सामूहिक चेतना को जाग्रत कर सकती है।
झांकी में जिस ‘वंदे मातरम्’ को प्रस्तुत किया जाएगा, वह विष्णुपंत पगनिस की ऐतिहासिक प्रस्तुति से प्रेरित है। राग सारंग में रिकॉर्ड किए गए इस संस्करण में औपनिवेशिक सेंसरशिप से बचने के लिए पदों के क्रम में परिवर्तन किया गया था। यही प्रस्तुति स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कलात्मक प्रतिरोध का एक सशक्त प्रतीक बन गई थी, जिसे अब नई पीढ़ी अपनी आवाज़ में दोहराती दिखेगी।
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गौरतलब है कि वर्ष 2021 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) संस्कृति मंत्रालय की झांकी की परिकल्पना और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभा रहा है। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के अनुसार, यह झांकी किसी एक मंत्रालय का नहीं बल्कि देश की सामूहिक भावनाओं, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का प्रतिनिधित्व करती है।
पिछले वर्षों की झांकियों पर नजर डालें तो 2021 में ‘आजादी के 75 साल’, 2022 में ‘अरबिंदो के 150 वर्ष’, 2023 में ‘शक्ति रूपेण संस्थित’, 2024 में ‘भारत: लोकतंत्र की मां’ और 2025 में ‘विरासत भी, विकास भी’ विषय रहे हैं। अब 2026 में ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ के साथ गणतंत्र दिवस की झांकी एक बार फिर इतिहास को वर्तमान से जोड़ते हुए राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा देने जा रही है।
