चीफ जस्टिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने के बाद से हंगामा मचा हुआ है। जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगाई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ पहली बार मीडिया के सामने आए और सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाए। देश की सबसे बड़ी अदालत के कामकाज को लेकर चारों जजों ने जो चिट्ठी चीफ जस्टिस को भेजी थी, वह सार्वजनिक कर दी गई है। चिट्ठी के मुताबिक, इस कोर्ट ने कई ऐसे न्यायिक आदेश पारित किए हैं, जिनसे चीफ जस्टिस के कामकाज पर असर पड़ा, लेकिन जस्टिस डिलिवरी सिस्टम और हाई कोर्ट की स्वतंत्रता बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी मुद्दे पर हिंदी न्यूज़ चैनल न्यूज़ 18 पर एक लाइव डिबेट का शो रखा गया था। इस शो में तमाम मेहमानों के साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और सीपीआई के नेता दिनेश वार्ष्णेय भी मौजूद थे।
डिबेट में संबित पात्रा ने कहा कि ये जजों का आपसी मामला है। किसी भी राजनीतिक पार्टी को न्यायपालिका के अंदरुनी मामले में दखल नहीं देना चाहिए। संबित ने लेफ्ट के नेता डी राजा की जस्टिस चेलामेश्वर से मुलाकात पर भी सवाल उठाए। संबित की बात पर रजमंदी दिखाते हुए शो के एंकर ने सीपीआई के नेता दिनेश वार्ष्णेय से पूछ लिया कि जब प्रेस कॉन्फ्रेंस हो गई थी और चिट्ठी भी सार्वजनिक हो गई थी तब इस तरह से गुप्त मुलाकात का क्या मतलब है।
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एंकर के सवाल पर सीपीआई नेता ने कहा कि कुछ बातें ऐसी होती हैं जो पब्लिक में नहीं कही जातीं। ये सुन एंकर ने फिर से पलटवार किया और पूछा कि मतलब कुछ खास बात हुई हैं अंदर। दिनेश वार्ष्णेय ने तुरंत अपनी बात को दूसरी तरफ ले जाते हुए कहा कि नहीं कोई खास बात नहीं हुई, वही सारी बातें हुईं जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुईं। सीपीआई नेता ने एंकर से ये भी कहा कि अब आप ये ना समझ लेना कि कांग्रेस और सीपीआई के कहने पर ही ये प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी।
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