लेखक चेतन भगत ने राहुल गांधी के भूकंप वाले बयान पर निशाना साधते हुए ट्विटर पर एक पोल करवाया। मंगलवार (27 दिसंबर) को चेतन भगत ने ट्वीट करके लोगों से पूछा, ‘पीएम के खिलाफ उनके भूंकप ला देने वाले खुलासे के बाद क्या आप कभी भी राहुल गांधी पर यकीन कर पाएंगे?’ इस सर्वे में 70 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह राहुल पर फिर से यकीन नहीं कर पाएंगे। वहीं 14 प्रतिशत लोग अब भी राहुल गांधी के साथ दिखे। इसके अलावा 16 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो कि कह रहे थे कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राहुल गांधी क्या बोलते हैं?
इससे पहले चेतन भगत ने एक और ट्वीट किया था। वह ट्वीट मोदी के बारे में था। उसमें लिखा था, ‘सोचिए कि अगर मोदी भ्रष्टाचारियों को पकड़ने और सजा देने के लिए देश में आपातकाल लगा दें तो क्या आप उन्हें सपोर्ट करेंगे?’ उस ट्वीट के पोल में 57 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि वह मोदी का साथ देंगे। वहीं 43 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने कहा था कि वह मोदी का समर्थन नहीं करेंगे।
इससे पहले 26 दिसंबर को चेतन भगत ने एक सर्वे और करवाया था। उसमें उन्होंने लिखा था कि अगर लोगों को मौका दिया जाए कि मोदी और लोकतंत्र में से किसी एक को चुनना है तो किसे चुनेंगे? उसपर 55 प्रतिशत लोगों ने मोदी को नेता के रूप में देखने की इच्छा जताई थी। वही 45 प्रतिशत ने कहा था कि लोकतंत्र ज्यादा जरूरी है।
After his 'earthquake' revelations against the PM, will you ever take Rahul Gandhi seriously again?
— Chetan Bhagat (@chetan_bhagat) December 27, 2016
Hypothetically, if Modi wanted to declare emergency for a while to totally eradicate corruption and punish corrupt, will you support him?
— Chetan Bhagat (@chetan_bhagat) December 27, 2016
If u had a choice of keeping Modi as our leader but with less democracy, would u be ok with it?
— Chetan Bhagat (@chetan_bhagat) December 26, 2016
Why not spend Rs 3,600cr on building a Shivaji canal that runs through Maharashtra and gives water to farmers so they don't commit suicide?
— Chetan Bhagat (@chetan_bhagat) December 24, 2016
गौरतलब है कि चेतन भगत ने महाराष्ट्र में बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार द्वारा छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा बनाए जाने पर भी सवाल खड़े किए थे। उन्होने लिखा था, ‘यह 3600 करोड़ रुपए शिवाजी नाम की एक नहर बनाने के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किए जा सकते जिससे महाराष्ट्र के किसानों को सुसाइड ना करना पड़े।’

