उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के आधार पर आरोप लगाया जा रहा है कि मुस्लिम व्यक्ति से जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया। इसी मामले में कुछ पत्रकार सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

दरअसल गाजियाबाद के सूफी अब्दुल समद ने आऱोप लगया कि उसे मुस्लिम होने की वजह से पीटा गया, दाढ़ी काटी गई, और जय श्री राम न बोलने पर उसे मारा गया। पीड़ित के वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर  तेजी से वायरल होने लगा। इस वायरल हो रहे वीडियो पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। द वायर की पत्रकार अराफ़ा खानम शेरवानी ने लिखा कि, “दादा के उम्र के एक मुस्लिम व्यक्ति को बेरहमी से मारा गया। जबरजस्ती दाढ़ी को भी काट दी गई । उन्हें जय श्री राम का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया। दाढ़ी काटने का मतलब उनकी धार्मिक पहचान का अपमान करना था। यह हिंदुओं के नाम पर हुआ है। आपकी चुप्पी ही इस बात का प्रमाण है”।

इंडिया टीवी के पत्रकार सौरव शर्मा ने अराफ़ा खानम शेरवानी के इस ट्वीट पर उनसे कहा कि, “झूठी खबर पर किये ट्वीट को डिलीट करने में शर्मिंदगी नही होनी चाहिए। मैंने भी कुछ लिखा था जिसे सच्चाई सामने आने के बाद हटा दिया है। मारपीट गलत है, कुछ आरोपी पकड़े भी गए हैं जिनमें ज़्यादातर मुसलमान है और जय श्री राम बुलवाने जैसी कोई बात नही हुई। इस वारदात को मज़हबी रंग न दिया जाए”।

अराफ़ा खानम शेरवानी के इस ट्वीट पर टीवी पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने पूछा कि क्या आप इस ट्वीट को डिलीट करना चाहेंगी? सौरव शर्मा के ट्वीट का रिप्लाई करते हुए ऋचा अनिरुद्ध ने कहा कि, ” ऐसा कैसे हो सकता है। फिर इनके “एजेंडा” का क्या होगा? इनकी सुविधा का हो तो मज़हबी रंग देते हैं , न हो तो चुप रहने की सलाह..सब इनकी मर्ज़ी से चलता है”। एक दूसरा ट्वीट करते हुए ऋचा अनिरुद्ध ने लिखा कि, “एक गैंग है। चुनाव के बाद बंगाल से जब महिलाओं के साथ बलात्कार/मारपीट के वीडियो आ रहे थे तो विरोध तो दूर,ये लोग उनमें से फेक वीडियो ढूंढने में जुटे थे और सच पर चुप थे। अब यूपी से मारपीट का वीडियो आया तो बिना सच्चाई जाने ये लोग उसमें “एंगल” डाल कर ट्वीट करने में लगे हैं”।