ज़ोमैटो के सीईओ दीपिंदर गोयल अक्सर अलग-अलग वजहों से सुर्खियों में छाए रहते हैं। हाल ही में दीपिंदर को राज शमानी के पॉप्युलर पॉडकास्ट Figuring Out में देखा गया। इस पॉडकास्ट में जिस चीज ने दर्शकों और इंटरनेट यूजर्स का ध्यान खींचा वो थी- ज़ोमैटो के सीईओ के चेहरे पर कान के पास लगा छोटा सा गैजेट। किसी चिप की तरह नज़र आ रहे इस गैजेट को लेकर इंटरनेट यूजर्स के मन में दिलचस्पी बढ़ गई है। यूजर्स इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। यह मिस्ट्री डिवाइस ‘Temple’ है जिसने लोगों को ध्यान खींचा। चलिए आपको बताते हैं दीपिंदर गोयल के इस मिस्ट्री गैजेट के बारे में…

पॉडकास्ट रिलीज होते ही इंटरनेट पर यह छोटा सा मेटैलिक गैजेट चर्चा का विषय बन गया। और यूजर्स ने ज़ूम करके, गूगल करके इस गैजेट के बारे में जानने की कोशिश की। इसे लेकर कई सारे मीम्स भी बन गए। कुछ यूजर्स ने जहां इसे एक्सटर्नल SSD जैसा बता दिया वहीं कुछ ने इसकी तुलना च्यूइंग गम से कर डाली।

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क्या है Temple?

दीपिंदर के चेहरे पर लगे इस गैजेट का नाम Temple है। यह एक एक्सपेरिमेंटल वियरेबल है जिसे रियल-टाइम में ब्रेन ब्लड फ्लो को ट्रैक करने के लिए बनाया गया है। इसके पीछे की सोच सरल लेकिन साहसिक है: मस्तिष्क में ब्लड फ्लो की लगातार निगरानी करना ताकि न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझा जा सके। मस्तिष्क में ब्लड फ्लो को कॉग्निटिव वेल-बीइंग का एक अहम संकेत माना जाता है खासकर जैसे-जैसे शरीर उम्रदराज़ होता है।

लेकिन इसे अगला स्मार्टवॉच जैसा क्रांतिकारी कंज्यूमर गैजेट ना मानें। क्योंकि एक अहम बात समझना जरूरी है कि Temple कोई कंज़्यूमर प्रोडक्ट नहीं है।

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बता दें कि दीपिंदर गोयल के पास इस डिवाइस का दिखना कोई पॉडकास्ट स्टंट नहीं है। वह करीब एक साल से ज्यादा वक्त से इसे खुद टेस्ट कर रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि Temple का आइडिया तब आया जब उनकी टीम Gravity Ageing Hypothesis नाम की एक थ्योर नामक अवधारणा पर काम कर रही थी। यह सिद्धांत बताता है कि दशकों तक गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव मस्तिष्क तक ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकता है और संभवतः उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है।

इस परिकल्पना ने विज्ञान की दुनिया में जिज्ञासा और बहस दोनों को जन्म दिया है। कई वैज्ञानिकों और विश्लेषकों का कहना है कि एजिंग यानी उम्रदराज होना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है जिसे केवल गुरुत्वाकर्षण के आधार पर नहीं समझाया जा सकता।

इसके बाद इस आइडिया के पीछे किए गए निवेश की बात सामने आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोयल ने अपनी निजी संपत्ति से करीब 2.5 करोड़ डॉलर (लगभग 225 करोड़ रुपये) Continue Research नाम की एक रिसर्च पहल में लगाए हैं। उन्होंने साफ किया है कि यह फंडिंग व्यक्तिगत और प्रयोगात्मक है जिसका मकसद जिज्ञासा-आधारित विज्ञान को आगे बढ़ाना है ना कि किसी प्रोडक्ट लाइन को लॉन्च करना।