इसरो (ISRO) के PSLV-C62 मिशन को बड़ा झटका लगा है। PSLV-C62 लॉन्च के तीसरे चरण (PS3) में एक अड़चन (anomaly) देखी गई जिससे उड़ान पथ में रुकावट आ गई। इसरो का कहना है कि तीसरी स्टेज में सैटेलाइट रास्ते से भटक गया जिसके चलते उपग्रहों को अपेक्षित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। इसके बाद इसरो ने विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया है। गौर करने वाली बात है कि मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था लेकिन सैटेलाइट की तैनाती नहीं हो पाई।

आपको बता दें कि इसरो के महत्वाकांक्षी PSLV-C62 रॉकेट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था। मिशन ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से उड़ान भरी थी।

स्पेस एजेंसी इसरो ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी, “PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के अंत में एक गड़बड़ी हुई। इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।” अन्वेषा सैटेलाइट का लॉन्च नाकामयाब रहने के बाद इसरो प्रमुख ने बयान जारी किया है। इसरो प्रमुख ने कहा, ‘तीसरे स्टेज में दिक्कत आई और दिशा बदल गी। डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जो भी अपडेट आएगा उसकी जानकारी दी जाएगी।’

धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर किया जाना था स्थापित

अन्वेषा धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाना था। अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस एक स्पाई (खुफिया) सैटेलाइट है जिसका मकसद सटीक निगरानी और मैपिंग करना है। यह धरती से कई सौ किलोमीटर ऊपर होने के बावजूद झाड़ी, जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें खींच सकता है।

15 सैटेलाइट्स में 7 भारतीय और 8 विदेशी

इस मिशन को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने लॉन्च किया था। NSIL, ISRO की कॉमर्शियल इकाई है। यह PSLV रॉकेट की कुल 64वीं उड़ान भी है। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बनाने और उसके लॉन्च के लिए किया जा रहा 9वां कॉमर्शियल मिशन है।

जिन 15 सैटेलाइट्स को लॉन्च किया गया है। उनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट भी शामिल हैं। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस इस लॉन्च के जरिए अपने 7 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेज रही है। 8 विदेशी सैटेलाइट्स में फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के सैटेलाइट शामिल हैं।

यह मिशन भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है। क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी की है। PSLV दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिना जाता है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं।

कैसे काम करता है अन्वेषा?

अन्वेषा सैटेलाइट, ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ (HRS) तकनीक पर काम करता है, जो रोशनी के ज्यादा स्पेक्ट्रम को डिटेक्ट करता है। यानी ये कुछ ही रंगों के बजाय रोशनी के सैकड़ों बारीक रंग पकड़ सकता है। ये सैटेलाइट जो बारीक कलर डिटेक्ट करता है, उससे यह पता चल जाता है कि तस्वीर असल में किस चीज की है। यह एक ऐसे स्कैनर की तरह है, जो अलग-अलग तरह की मिट्टी, पौधे, इंसानी एक्टिविटी या किसी भी चीज को उसकी अलग चमक से पहचान सकता है।