download digital constitution pdf file: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (26 नवंबर) को पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में संविधान का डिजिटल वर्जन रिलीज किया। भारतीय संविधान के डिजिटल वर्जन को 9 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है।
संविधन दिवस के अवसर पर ‘संविधान सदन’ में आयोजित इवेंट में राष्ट्रपति ने मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलगू, उड़िया और असमी भाषा में डिजिटल वर्जन रिलीज किया। इसके अलावा करीब 50 साल के बाद संविधान के पंजाबी एडिशन को भी अपडेट किया जा रहा है।
अगर आप भी संविधान के डिजिटल वर्जन को डाउनलोड करने की सोच रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं पूरा तरीका…
-सबसे पहले भारत सरकार के सरकारी पोर्टल https://legislative.gov.in/constitution-of-india/ पर जाएं। यहां सभी भाषाओं के लिए अलग-अलग डिजिटल फाइल्स उपलब्ध हैं। आपको हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, तेलगू, तमिल, सिंधी, संस्कृत, पंजाबी, उड़िया, नेपाली, मराठी, मणिपुरी, मलयालम, मैथिली, कोंकणी, कश्मीरी, कन्नड़, गुजराती, डोगरी, बंगाली, असमी की अलग-अलग फाइल्स लिस्ट-वाइज मिल जाएंगी।
-अब जिस भी भाषा में आप डिजिटल संविधान डाउनलोड करना चाहते हैं, उसके आगे बने View ऑप्शन पर क्लिक करें
-इसके बाद एक नए टैब में संविधान PDF फॉरमेट में खुलकर आपके सामने आ जाएगा।
-अगर आप संविधान की कॉपी को सेव करना चाहते हैं तो राइट क्लिक करें और Save As करके अपने PC में सेव कर लें।
इस तरह डाउनलोड फाइल को आप जब चाहें तब ऑफलाइन व्यू कर सकते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस मौके पर कहा कि संविधान औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रवादी सोच अपनाने के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है। उन्होंने ‘संविधान सदन’ (पुराना संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में आयोजित संविधान दिवस समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए विकास का एक नया मॉडल पेश कर रहा है। उनका कहना था, ‘‘हमारे संविधान निर्माता चाहते थे कि हमारे व्यक्तिगत, लोकतांत्रिक अधिकार हमेशा सुरक्षित रहें। संविधान औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़ने और राष्ट्रवादी सोच को अपनाने के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाना देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। महिलाएं, युवा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, किसान, मध्यम वर्ग, नया मध्यम वर्ग हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।’’ उनका कहना था कि संविधान दिवस मनाने की परंपरा आरंभ करने की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वो कम है।
