देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है। हाल ही में 25 दिसंबर और 1 जनवरी को हुई हड़ताल के बाद सरकार ने डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार के दखल के चलते अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से 10 मिनट में डिलीवरी का नियम हटाया जा रहा है।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड्स से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है। यह फैसला डिलीवरी बॉय की सुरक्षा और काम के दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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इस मुद्दे पर श्रम मंत्रालय ने ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (zepto), स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि तेज़ डिलीवरी के नाम पर डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती और समय सीमा तय करने के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सरकार की इस पहल के बाद अब 10 मिनट के भीतर डिलीवरी देने की प्रतिस्पर्धा पर ब्रेक लगता दिख रहा है। ब्लिंकिट ने पुष्टि की है कि वह अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी वाला फीचर हटाने जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य क्विक-कॉमर्स कंपनियां भी इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।
फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म की वैल्यूएशन में भारी बढ़ोतरी
क्विक-कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म का तेजी से विस्तार हुआ है। कंपनियों की वैल्यूएशन में भारी इजाफा हुआ है। Swiggy की वैल्यूएशन लगभग 11 अरब डॉलर आंकी गई है जबकि उसकी प्रतिद्वंद्वी Zomato का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 28 अरब डॉलर है जो इस सेक्टर के स्केल और असर को दिखाता है।
स्विगी की इंस्टामार्ट, ब्लिंकिट और जेप्टो सहित कई प्लेटफॉर्म्स ने अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी- खासतौर पर 10 मिनट में डिलीवरी के इर्दगिर्द ही अपनी ब्रांडिंग रखी है। हालांकि, डिलीवरी वर्कर्स का कहना है कि इस तरह की मार्केटिंग रणनीतियां ज़मीनी स्तर पर भारी दबाव पैदा करती है जिसका असर उनकी सुरक्षा पर पड़ता है।
जनसत्ता के सहयोगी The Indian Express ने कुछ डिलीवरी पार्टनर्स से बात की और 10 मिनट डिलीवरी में होने वाले खतरे व वेतन पारदर्शिता की कमी पर बात की। ईस्ट ऑफ कैलाश में एक ब्लिंकिट वेयरहाउस में डिलीवरी पार्टनर ने कहा, ‘अगर हम डिलीवरी के लिए एक सेकंड भी देर हो जाते हैं तो हमारे पूरे दिन का इंसेंटिव काट लिया जाता है। हम रेड लाइट जंप करते हैं और कम विज़िबिलिटी में भी ड्राइव करते हैं।’ यहां पढ़ें पूरी खबर…
