हो जाएं हम बोनसाई तो
हो जाएं हम बोनसाई तो
कितने मजे हमारे होंगे
तीस इंच के हों पापाजी,
बीस इंच की मम्मी।
मैं हो जाऊं आठ इंच का,
पांच इंच की नन्ही।
एक इंच के बस्ते लेकर,
हम शाला को जाते होंगे।
हो बस लंबी बारह फुट की,
जिसमें सीटें साठ।
तीन इंच चौड़ी सीटों पर,
हों तब अपने ठाठ।
हिचकोले खाती इस बस में,
मस्ती मौज मनाते होंगे।
परिधि पांच मिलीमीटर के,
होंगे गोल परांठे।
होंगे तीन मिलीमीटर के,
छुरियां चम्मच कांटे।
लंच बॉक्स के नन्हे-नन्हे
गरम परांठे खाते होंगे।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
अयुक्त / आयुक्त
अयोग्य, अनुचित, असंबद्ध, बेतुका के लिए संस्कृत में अयुक्त शब्द है, जबकि आयुक्त किसी आयोग के मुखिया को कहते हैं। जैसे निर्वाचन आयुक्त। आयुक्त के लिए अंगरेजी में कमीश्नर शब्द चलन में है।
तरई / तराई
आसमान के तारों को लोक या देशज भाषा में तरई भी कहते हैं। जबकि तराई शब्द का मतलब है पहाड़ के नीचे के मैदानी भाग से है। इसके अलावा जब किसी चीज को गीला किया जाता है, तो उसे तराई करना कहते हैं।
