‘मंदिर का पुजारी भगवान का सेवक है…’, गुजरात हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
कोर्ट ने कहा कि वह भूमिस्वामी नहीं है, वह तो केवल देवता का सेवक है। इसलिए, सेवक को यह दावा करने का कोई अधिकार नहीं है कि विवादित संपत्ति पर उसका कब्जा उसके स्वामी की ओर से है और प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत के आधार पर उसका स्वामित्व परिपक्व हो गया है।