Yogini Ekadashi 2019 Vrat Katha Vidhi And Importance: योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ती है। विष्णु पुराण के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। साल 2019 में योगिनी एकादशी का व्रत 29 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ पीपल की पूजा का भी विधान है। कहते हैं कि इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा योगिनी एकादशी के व्रत का फल 88 हजार ब्राह्मणों के दान के बराबर माना गया है। ऐसे में आगे जानते हैं योगिनी एकादशी की व्रत-कथा, विधि और महत्व।
विधि: पंडितों के अनुसार योगनी एकादशी के दिन व्रत रखना चाहिए। व्रत के दौरान पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया है। उपवास में एक समय फलाहारी करना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। पूजन के दौरान ‘मम सकल पापक्षयपूर्वक कुष्ठादिरोग निवृत्तिकामनया योगिन्येकादशीव्रतमहं करिष्ये।’ इस मंत्र को बोलना चाहिए। फिर भगवान विष्णु को पंचामृत स्नान कराना चाहिए। अब पंचामृत को अपने घर के सभी सदस्य के ऊपर छिड़कना चाहिए। इसके बाद अगर संभव हो तो विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें, कराएं या सुनें।
व्रत कथा: योगिनी एकादशी की व्रत कथा का वर्णन पद्मपुराण के उत्तरखंड में मिलता है। जिसके अनुसार योगिनी एकादशी की कथा भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी। जिसमें श्रीकृष्ण कहते हैं कि स्वर्ग की अलकापुरी नाम की नगरी में एक कुबेर नाम का राजा था। वह भगवान शिव का भक्त था। जिसके यहां हेम नाम का माली पूजा के लिए फूल लाया करता था। हेम की विशालाक्षी नाम की सुंदर पत्नी थी। एक दिन वह मानसरोवर से फूल लेकर तो आ गया, लेकिन काम भाव में पड़ने के कारण वह अपनी पत्नी के साथ आनंद की प्राप्ति में रम गया। इधर पूजन में देरी होता देख राजा ने अपने सेवकों को उस माली के न आने का कारण जानने के लिए भेजा।
सेवकों ने आकर राजा को पूरी घटना बता दी। यह सुनकर राजा कुबेर बहुत अधिक गुस्से में आ गए और माली को श्राप दिया कि “तू स्त्री वियोग से दुखी होकर धरती पर जाकर कोढ़ी बनेगा।” इस श्राप से हेम माली उसी वक्त धरती पर गिर गया। जिसके बाद वह कोढ़ी बन गया। धरती पर बहुत दिनों तक हेम माली कष्ट भोगता रहा, लेकिन उसे पूर्व जन्म की बात याद न रही। एक दिन वह घूमते हुए मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंचा। उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि बोले- ‘तू ऐसा कौन सा पाप किया है जिस कारण तुम्हें ऐसा कष्ट भोगना पड़ रहा है।’ हेम माली ने ऋषि को पूरी बात सुनाई। उसकी व्यथा सुनकर मार्कण्डेय ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। जिसके बाद हेम माली ने पूरे विधि-विधान से योगिनी एकादशी का व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से वह अपनी पुरानी अवस्था में आ गया और अपनी पत्नी के साथ सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा।
