भगवान की पूजा में फूल को अत्यधिक महत्व दिया गया है। आमतौर देवी-देवताओं में विश्वास रखने वाले लोग पूजा के दौरान फूल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान को फूल प्रिय होते हैं। इसके अलावा शुभ कार्यों में भी फूल को प्रयोग में लाया जाता है। वहीं मान्यता यह भी है कि भगवान जीतने अधिक फूल चढ़ाने से जीतने अधिक प्रसन्न होते हैं उतना किसी अन्य चीज को चढ़ाने से नहीं। देवी-देवताओं को चढ़ाया जाने वाला फूल अमूमन ताजे ही प्रयोग में लिए जाते हैं। शास्त्रों की माने तो देवी-देवताओं को बासी या मुरझाए फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। परंतु, क्या आप जानते हैं कि भगवान की पूजा में बासी या मुरझाए फूल क्यों नहीं चढ़ाए जाते हैं? अगर नहीं, तो आगे हम इसे जानते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फूल में अलग-अलग तरह के पांचों तत्व पाए जाते हैं। पृथ्वी तत्व होने के कारण इसमें सुगंध होती है। अग्नि तत्व होने की वजह से ये हमें स्थूल रूप में हमें दिखाई देती है। वायु तत्व होने के कारण हम इसे अपनी हाथों से स्पर्श करते हैं। ऐसे में देवी-देवताओं को फूल चढ़ाते समय डंठल के साथ ही इसे अर्पित करना चाहिए। डंठल को हमेशा देवी-देवता की ओर और फूल को अपनी तरफ कर के अर्पित करना शुभ माना गया है।
अगर भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना है तो ऐसे में इसकी डंठल को भगवान की ओर और इसकी पत्तियों को अपनी ओर कर के चढ़ाना चाहिए। मान्यता है कि फूलों से पूजा करने वालों को सुगंध के रूप में शक्ति की तरंगें प्राप्त होती है। साथ ही साथ देवी-देवताओं को अर्पित फूलों से 2-3 घंटे तक सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता रहता है। जैसे ही फूल मुरझाना शुरू करता है सकारात्मक ऊर्जा कम होने लगती है। इसलिए कहा जाता है कि बासी या मुरझाए हुए फूलों को पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
