हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा मानव के सृजन के देवता हैं। इन्हें सभी शिल्पकारों और रचनाकारों का इष्ट देव कहा जाता है। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि विश्वकर्मा जी भगवान ब्रह्मा के पुत्र हैं और उन्होंने ही ब्रह्मांड की रचना की थी। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि इस चराचर जगत की रचना विश्वकर्मा जी ने नहीं, बल्कि भगवान विष्णु ने की थी। परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान विश्वकर्मा को शिल्पकार क्यों कहा जाता है? साथ ही उन्हें देवशिल्पी यानि निर्माण का देवता कहे जाने के पीछे क्या धार्मिक कारण हैं? यदि नहीं, तो आगे इसे जानिए।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा ने कई मंदिरों को सुंदर आकार और स्वरूप दिया है। जिसमें से एक सोने की लंका है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार सोने की लंका का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था। ऐसा मान जाता है कि भगवान शिव ने पार्वती से विवाह के बाद सोने की लंका का निर्माण विश्वकर्मा जी से करवाया था। शिव जी ने महापंडित को गृह पूजन के लिए बुलाया तो रावण ने दक्षिणा में उनसे ये सोने का महल ही मांग लिया।
साथ ही धर्मग्रंथ गीता के अनुसार भगवान कृष्ण ने द्वापर युग में भगवान विश्वकर्मा से द्वारिका नगरी का निर्माण करवाया था। इस नागरी की लंबाई, चौड़ाई और 48 कोस थी। उसमें वास्तु शस्त्र के अनुसार चौड़ी सड़कों, चौराहों और गलियों का निर्माण किया गया था। वहीं महाभारत के अनुसार तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युमाली का वध करने के लिए भगवान शिव जिस रथ से गए थे उसे भगवान विश्वकर्मा जी ने ही बनवाया था। इसके अलावा मान्यता है कि भगवान कृष्ण के प्रेम में पागल गोपियां एक बार एक तालाब के किनारे उनका इंतजार कर रहीं थीं।
कुछ दिन बाद जब कृष्ण वहां आए तो उन्होंने गोपियों का समर्पण देखकर उस तालाब का नाम गोपी तालाब रखने का निर्णय किया। परंतु गोपियों ने उन्हें इस तालाब की जगह नया तालाब बनवाने को कहा। तब श्रीकृष्ण के आदेश पर विश्वकर्मा जी ने एक खूबसूरत तालाब का निर्माण किया, जिसे वर्तमान में गोपी तालाब के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने एकबार विश्वकर्मा जी से धरती पर उनका ऐसी जगह मंदिर बनाने को कहा जहां पांच कोस तक कोई शव न जलाया गया हो। इसके बाद विश्वकर्मा जी ने भगवान विष्णु का मंदिर बनवाया। आज यह मंदिर छत्तीसगढ़ में राजीव लोचन मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
