भगवान शिव की पूजा सदियों से हो रही है। लेकिन इस बात को बहुत कम लोग ही जानते हैं कि शिव का एक और रूप है जो अर्धनारीश्वर है। दरअसल भगवान शिव ने यह रूप अपनी मर्जी से धारण किया था। वे इस रूप के जरिए लोगों को संदेश देना चाहते थे कि स्त्री और पुरुष समान हैं। भगवान शंकर के अर्धनारीश्वर अवतार में शिव का आधा शरीर स्त्री और आधा शरीर पुरुष का है। शिव का यह अवतार स्त्री और पुरुष की समानता को दर्शाता है। समाज, परिवार और जीवन में जितना महत्व पुरुष का है उतना ही स्त्री का भी है। भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर अवतार क्यों किया आगे हम इसे जानते हैं।
कहते हैं कि एक बार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का काम समाप्त किया। तब उन्होंने देखा कि जैसी सृष्टि उन्होंने बनाई है उसमें विकास की गति नहीं है। जीतने पशु-पक्षी और कीट-पतंग की रचना उन्होंने की है, उनकी संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। इसे देखकर ब्रह्मा जी चिंतित हुए। अपनी चिंता लिए ब्रह्मा जी भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा कि आप भगवान शिव की आराधना करें। वही कोई उपाय बताएंगे। जिसके बाद ब्रह्मा जी ने शिव की तपस्या शुरू कर दी। इससे भगवान शिव प्रकट हुए और मैथुनी सृष्टि की रचना का आदेश दिया।
ब्रह्मा जी ने भगवान शिव से पूछा कि मौथुनी सृष्टि कैसी होगी? ब्रह्मा जी को मौथुनी सृष्टि का रहस्य समझने के लिए भगवान शिव ने पाने शरीर के आधे भाग को नारी रूप में प्रकट कर दिया। इसके बाद नर और नारी भाग अगल हो गए। ब्रह्मा जी नारी को प्रकट करने में असमर्थ थे। इसलिए ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर शिव यानि शिव के नारी स्वरूप ने अपने अपने रूप से एक अन्य नारी की रचना की और ब्रह्मा जी को सौंप दिया। इसके बाद अर्धनारीश्वर स्वरूप एक होकर फिर से पूर्ण शिव के रूप में प्रकट हो गए। फिर मैथुनी सृष्टि से संसार का विकास तेजी से होने लगा।
