नवरात्रि में देवी दुर्गा की उपासना में सिंदूर का प्रयोग किया जाता है। सिंदूर के इस प्रयोग के पीछे का वजह ये है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं। इसलिए नवरात्रि में दिनों में अधिकांश घरों में लोग सिंदूर के प्रयोग से देवी दुर्गा को प्रसन्न करते हैं। नवरात्रि में प्रयोग किया जाने वाला सिंदूर लाल नहीं होता बल्कि नारंगी होता है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि नवरात्रि में इस नारंगी सिंदूर का प्रयोग क्यों किया जाता है? साथ ही इसका प्रयोग किस प्रकार किया जता है और इसके क्या-क्या लाभ बताए गए हैं? यदि नहीं! तो आगे हम इसे जानते हैं।
सिंदूर के इस प्रयोग के बारे में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज से परेशान है तो पीपल के पत्ते में सिंदूर डालकर उसमें चमेली का तेल मिलाकर और पीपल के पत्ते के चिकने वाले हिस्से पर सिंदूर से राम लिखकर उसे हनुमान जी के चरणों में चढ़ाना चाहिए। साथ ही किसी पुरुष या स्त्री के वैवाहिक जीवन में कोई दिक्कत आ रही है तो नवरात्रि में किसी भी दिन एक पान का पत्ता लेकर उसके चिकने हिस्से पर सिंदूर से ह्रीं लिखकर मां दुर्गा को अर्पित करना चाहिए।
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इसके अलावा यदि ग्रह दशा खराब है, दुर्घटनाओं के योग बने हुए हैं तो ऐसे में मंगलवार के दिन चमेली का तेल मिलाकर हनुमान जी के चरणों में सिंदूर लगाना चाहिए। साथ ही सिंदूर उसी को देना चाहिए, गिफ्ट में या दान में जिससे आपके प्रेम संबंध हो या जिसके साथ आपका संबंध बेहतर हो। जिसके साथ संबंध ठीक न हो या जिसे आप न जानते हो उसे सिंदूर नहीं देना चाहिए। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि अनजान लोगों को नवरात्रि के दौरान सिंदूर देने से व्यक्ति का किस्मत भी उस सिंदूर के साथ चला जाता है। इन्हीं सब कारणों से नवरात्रि में सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।

