Weekly Vrat Tyohar (21 November To 27 November): वैदिक पंचांग अनुसार वर्तमान सप्ताह की शुरुआत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से हो चुकी है। इस सप्ताह की शुरुआत प्रदोष व्रत से हो रही है। साथ ही इस सप्ताह मार्गशीर्ष अमावस्या, मासिक शिवरात्रि और विनायक चतुर्थी जैसे प्रमुख व्रत और त्याहार पड़ेंगे। आइए जानते हैं इन त्योहारों की तारीख और महत्व…
21 नवंबर, सोमवार: (सोम प्रदोष व्रत)
सोम प्रदोष व्रत का शास्त्रों में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव की उपासना की जाती है। मान्यता है इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा- अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शाम के समय भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। प्रदोष व्रत का आरंभ 21 नवंबर को सुबह 10 बजकर 06 मिनट से हो रहा है। वहीं इसका समापन 22 नवंबर को सुबह 08 बजकर 48 मिनट पर होगा। वहीं प्रदोष व्रत 21 नवंबर को ही रखा जाएगा।
22 नवंबर, मंगलवार: (मासिक शिवरात्रि)
हर माह मासिक शिवरात्रि पड़ती है। साथ ही पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। मासिक शिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा करने का विधान है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा एक साथ करने से विवाह के योग बनते हैं। इसलिए जो लोग अविवाहित हैं, वो लोग खासकर इस दिन पूजा कर सकते हैं।
23 नवंबर, बुधवार: (मार्गशीर्ष अमावस्या)
अमावस्या तिथि पितरों की पूजा- अर्चना के लिए खास मानी जाती है। इस दिन पितरों का तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इस दिन पितरोंं को आमंत्रित करते हुए इस मंत्र को बोलें- ॐ आगच्छन्तु में पितर एवं गृह्णन्तु जलान्जलिम’ यानी हे पितरों, आइए और जलांजलि ग्रहण करें। फ्यूचर पंचांग के मुताबिक मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि 23 नवंबर 2022 को सुबह 06 बजकर 54 मिनट से आरंभ होगी और अमावस्या तिथि का अंत 24 नवंबर 2022 को सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा। इसलिए अमावस्या 23 नवंबर को मनाई जाएगी।
27 नवंबर, रविवार: (विनायक चतुर्थी)
पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा की जाती है। मान्यता है जो लोग विधि- विधान से गणेष जी की पूजा- अर्चना करते हैं भगवान गणेष उनके सभी कष्टों को हर लेते हैं। इस साल विनायत चुतर्थी 27 नवंबर को पड़ रही है।
