हिंदू पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष पंचमी को विवाह पंचमी मनाई जाती है। इस दिन के लिए मान्यता है कि पंचमी के दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन को भगवान राम के विवाहोत्सव के रुप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि माता सीता जनक पुत्री थी जो मिथिला राज्य के राजा थे, इसलिए ये पर्व उत्साह के साथ अयोध्या और जनकपुरी यानि नेपाल में मनाया जाता है। नेपाल कैलेंडर के अनुसार इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह करवाना शुभ माना जाता है। इस वर्ष विवाह पंचमी का पर्व 23 नवंबर को है। इस दिन की तैयारियां जनकपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में 7 दिन पहले से शुरु हो जाती है।
माना जाता है कि विवाह पंचमी के दिन विशेष विधान से पूजा करना शुभ माना गया है। यदि किसी के विवाह में समस्याएं आ रही हो तो उसे विशेष रुप से इस दिन पूजा करनी चाहिए। मन के अनुसार विवाह करना चाहते हैं तो इस दिन पूजा करना लाभदायक हो सकता है। पति-पत्नी के बिगड़े हुए रिश्तों में सुधार आता है। रामायण के बालकाण्ड में राम और सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह उठकर भगवान राम के विवाह का संकल्प लेना चाहिए और इसके बाद विवाह की कुछ तैयारियां कर लेनी चाहिए जिसमें हवन कुंड आदि आवश्यक माने जाते हैं।
विवाह के स्थान पर भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक स्वरुप वाली प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। इसके बाद माता सीता और भगवान राम को पीले वस्त्र अर्पित करें और इनके सामने बैठकर बालकांड विवाह प्रसंग का पाठ करें और इसके बाद ऊं जानकीवल्लभाय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके बाद भगवान राम और माता सीता का गठबंधन करके आरती करें। इसके बाद उस गठबंधन लगे वस्त्र को अपने पास रख लें। इस दिन के लिए मान्यता है कि भगवान राम ने भगवान शिव का धनुष तोड़कर स्वयंवर की शर्त पूरी की थी और माता सीता ने उन्हें जयमाला पहनाई थी।


