Vaishakh/Budh Purnima 2020: सनातन धर्म में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना फलदायी होता है। पिछले एक महीने से चले आ रहे वैशाख स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्ण आहूति वैशाख पूर्णिमा के दिन दी जाती है। मान्यता है कि इसी दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha) ने जन्म लिया था। वहीं, हिन्दू धर्म में बुद्ध (Buddha) को श्री हरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है।
वैशाख पूर्णिमा व्रत व पूजा विधि: वैशाख पूर्णिमा के दिन सत्यविनायक का व्रत भी रखा जाता है जिससे धर्मराज प्रसन्न होते हैं। इस व्रत को रखने से दरिद्रता दूर होती है। व्रती को पूर्णिमा के दिन प्रात:काल उठकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ होना चाहिये। उसके बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिये। भगवान सत्यनारायण की कथा करें। रात के समय चंद्रमा की पूजा कर उन्हें अर्घ्य दें। भगवान को भोग लगाएं। तत्पश्चात किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन करवाकर दान दक्षिणा देनी चाहिए। इसके बाद खुद भी भोजन ग्रहण करें।
वैशाख पूर्णिमा मुहूर्त:
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मई 06, 2020 को 07:44 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – मई 07, 2020 को 04:14 पी एम बजे
बुद्ध पूर्णिमा का महत्व: वैशाख महीने की पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। इस पूर्णिमा को सिद्ध विनायक पूर्णिमा या सत्य विनायक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। वैशाख माह में आने वाली पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष और चांद भी अपनी उच्च राशि तुला में होते हैं। कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान समस्त पापों का नाश करता है। हालांकि इस बार लॉकडाउन के चलते गंगा स्नान नहीं कर पाएंगे। लेकिन आप घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान कृष्ण के दोस्त सुदामा वैशाख पूर्णिमा के दिन ही उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। जिसकी कृपा से सुदामा की गरीबी नष्ट हो गई।
इस दिन मृत्यु के देवता धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है। कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं और उनके प्रसन्न होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है।
