पितृ-दोष निवारण के लिए अक्षय तृतीया बेहद खास मुहूर्त होता है। ज्योतिष के अनुसार पितृ दोष और पितृ ऋण से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली होती है। माना जाता है कि पितृ दोष से व्यक्ति को सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक उन्नति में अनेक बाधाएं आती हैं। ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि यदि जन्म कुंडली में सूर्य पर शनि और राहु-केतु की दृष्टि है तो ऐसे में पितृ दोष उत्पन्न होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दोष के निवारण के लिए अक्षय तृतीया सबसे शुभ अवसर होता है। आगे जानते हैं अक्षय तृतीया पर पितृ दोष निवारण के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं और क्यों?
अक्षय तृतीया एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। इसे अबूझ और स्वयंसिद्ध मुहूर्त की मान्यता प्राप्त है। हर साल अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार अक्षय तृतीया 07 मई 2019 को सरवार्थसिद्धि योग में रहेगा। जो बहुत ही दुर्लभ और शुभ संयोग है। अक्षय तृतीया के दिन सम्पन्न के गई साधनाएं और दान अक्षय रहकर शीघ्र फलदायी होते हैं। कहते हैं कि यह शुभ संयोग पितृ दोष निवारण के लिए बहुत ही शुभ होता है।
जिन जातकों की जन्म कुंडली में पितृ दोष है वे अक्षय तृतीया के दिन सुबह उठकर किसी स्वच्छ स्थान या मंदिर में लगे पीपल के ऊपर अपने पितृ गणों के निमित्त घर की बनी मिठाई और एक मटके में शुद्ध जल रखें। फिर पीपल के वृक्ष के नीचे धूप-दीप जलाकर अपने पितृ की संतुष्टि के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद बिना पीछे देखे सीधे अपने घर लौट आएं। माना जाता है कि अक्षय तृतीया के अवसर पर ऐसा करने से पितृ-दोष से जल्द ही छुटकारा मिल जाता है।

