ज्योतिष शास्त्र अनुसार जब भी सूर्य ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में गोचर या किसी अन्य ग्रह के साथ युति बनाते हैं। तो इसका प्रभाव सभी राशियों सहित देश- दुनिया पर देखने को मिलता है। सात ही यह गोचर कुछ राशियों के लिए शुभ रहता है, तो कुछ राशियों के लिए अशुभ साबित होता है। आपको बता दें कि ग्रहों के राजा सूर्य ने 17 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश कर लिया है, जहां पहले से केतु ग्रह विराजमान हैं। इसलिए केतु और सूर्य की युति तुला राशि में बन रही है। जो शुभ नहीं मानी जा रही हैं। वहीं ग्रहण भी 25 अक्टूबर को पड़ने जा रहा है। इसलिए इस दौरान 3 राशि के लोगों को थोड़ा संभलकर चलना चाहिए। आइए जानते हैं ये राशियां कौन सी हैं…
मेष राशि: सूर्य और केतु की युति आप लोगों को थोड़ी कष्टाकारी साबित हो सकती है। क्योंकि मेष राशि में राहु ग्रह विराजमान हैं और राहु की दृष्टि पंचम भाव पर है और पंचम भाव के स्वामी सूर्य देव नीच के विराजमान हैं। इसलिए इस समय आपको सेहत को लेकर परेशानी हो सकती है। साथ ही इस समय जो हार्ट के मरीज हैं उनको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही इस समय आपको कारोबार में घाटा हो सकता है। वहीं जिन लोगों की जन्मकुंडली में केतु की दशा चल रही है, तो उनको यह समय ज्यादा कष्टकारी साबित हो सकता है।
सिंह राशि: आप लोगों के लिए सूर्य और केतु की युति नुकसानदायक साबित हो सकती है। क्योंकि आपकी गोचर कुंडली के केंद्र स्थान में कोई ग्रह नहीं है। वहीं आपकी राशि के स्वामी सिंह नीच अवस्था में विराजमान हैं। इसलिए आप लोगों को इस समय स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही वाहन सावधानी से चलाएं, क्योंकि दुर्घटना के योग बने हुए हैं। वहीं अगर आप व्यापार में निवेश करना चाहते हैं तो अभी रहने दें। क्योंकि समय अनुकूल नहीं है।
तुला राशि: आप लोगों के लिए सूर्य और केतु ग्रह की युति बनने से कारोबार में थोड़ा नुकसान हो सकता है। साथ ही अगर आप व्यापार के काम से यात्रा करना चाह रहे हैं तो अभी टाल दें। क्योंकि यात्रा में कोई दुर्घटना हो सकती है। साथ ही अभी पार्टनरशिप का काम शुरू नहीं करें, तो बेहतर है। वहीं आपको इस समय पेट और हार्ट से संबंधित परेशानी हो सकती है। इसलिए बाहर के खाना खाने से बचें और अगर आप हार्ट पेशेंट हैं तो दवाई समय पर लें।
करें ये उपाय: आप लोगों को सूर्य और केतु के बीज मंत्र का जाप करना है। साथ ही सूर्य और केतु ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना है।
