Super Moon (Super Flower Moon) 2020: साल 2020 का आखिरी सुपरमून (Supermoon) 7 मई को देखा जायेगा। जो शाम 4:15 बजे अपने पूरे प्रभाव में दिखाई देगा। हालांकि भारत के लोग इस सुपर फ्लॉवर मून (Super Flower Moon) का नजारा नहीं देख पायेंगे क्योंकि इस समय भारत में दोपहर होगी। लेकिन इंटरनेट के माध्यम से आप ऑनलाइन जरूर इस खूबसूरत सुपरमून को देख सकते हैं। सुपरमून के महीने भर बाद चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2020) लगेगा। जो 5 जून की रात से शुरू होगा। खास बात ये है कि इसे भारत में भी देखा जा सकेगा।
क्या होता है सुपरमून (What Is Supermoon)? इससे पहले सुपरमून अप्रैल में दिखाई दिया था और इसे सुपर पिंक मून कहा गया। लेकिन ये सुपरमून क्या है और क्यों इसे खास माना जाता है। तो इस बारे में आपको हम यहां बताने जा रहे हैं। एक सुपरमून ऑर्बिट पृथ्वी के सबसे करीब होता है। हमारे ग्रह यानी पृथ्वी के ज्यादा नज़दीक होने के कारण, चंद्रमा बहुत बड़ा और चमकीला दिखाई देता है। 7 मई को दिखाई देने वाला सुपरमून हमारे ग्रह से 3,61,184 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है और आमतौर पर पृथ्वी और चंद्रमा के बीच औसत दूरी 384,400 किलोमीटर की होती है। ये जरूरी नहीं है कि हर पूर्णिमा के दिन सुपरमून हो। हमें पूरा चंद्रमा तब भी दिखाई दे सकता है जब वह हमारे ग्रह से ज्यादा दूरी पर स्थित हो।
मई के मून को फ्लॉवर मून क्यों कहा गया है? अप्रैल के सुपरमून को पिंक मून कहा गया, इसी तरह मई के सुपरमून को फ्लॉवर मून कहा जा रहा है। ऐसा इसलिए है कि फुल मून का नाम अमेरिकी मौसमों, फूलों और क्षेत्रों के नाम पर रखा गया है जो पहली बार Maine Farmer’s Almanac में प्रकाशित हुए थे। प्रकाशन के अनुसार उत्तरी अमेरिका में एलगोनक्विन जनजाति ने मई के पूर्णिमा का नाम फ्लॉवर मून इसलिए रखा, क्योंकि इस समय के आसपास बेहद बड़ी संख्या में फूल खिलते हैं। इस महीने की पूर्णिमा के अन्य नामों में कॉर्न प्लांटिंग मून और मिल्क मून भी शामिल हैं।
यहां सुपरमून देख सकते हैं लाइव: Slooh और Virtual Telescope सहित लोकप्रिय यूट्यूब चैनल सुपरमून की लाइवस्ट्रीम करने के लिए जाने जाते हैं। आने वाले दिनों में आपको इनके YouTube चैनल पर एक लाइव लिंक ज़रूर देखने को मिल जाएगा।

Highlights
इसे सुपर फ्लावर मून, कोर्न प्लांटिंग मून और फूल मिल्क मून भी कहा जाता है। नासा के अनुसार, सुपर फ्लावर मून भारतीय समयानुसार गुरुवार 7 मई की शाम 4.15 बजे अपने चरम पर होगा। यानी इस समय ये पृथ्वी के बेहद करीब होगा। इसे Flower Moon नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि ये फूलों के खिलने का समय होता है। इस सुपरमून को देखने का सबसे अच्छा समय चंद्रोदय और चंद्रमास के दौरान होता है।
आज सुपर फ्लावर मून दिख रहा है, जबकि नासा के अनुसार 27 अप्रैल को 2021 को पिंक मून (Pink Moon) देखा जा सकेगा। जिसके लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
वर्ष 2020 का यह अंतिम सुपरमून है। फरवरी, मार्च और अप्रैल में सुपरमून देखा जा चुका है। अगला सुपरमून वर्ष 2021 के अप्रैल माह में दिखेगा। नासा के अनुसार, इस साल के मई महीने में दिखने वाले इस पूर्णिमा के चांद को वैशाख फेस्टिवल मून भी कहा जा रहा है।
आमतौर पर पृथ्वी और चंद्रमा के बीच औसत दूरी 384,400 किलोमीटर होती है। यह सुपरमून के समय कुछ कम हो जाती है. इस बार धरती से चांद की दूरी 361,184 किलोमीटर ही रह जाएगी। सुपरमून की वजह से चांद हर दिन की तुलना में 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार नजर आता है। इसे नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह फूलों के खिलने का समय होता है।
7 अप्रैल को देखे गए सुपरमून का नाम पिंक सुपरमून भी बसंत ऋतु में खिलने वाले एक जंगली फूल से जोड़कर रखा गया है जो गुलाबी रंग का होता है। इसे मॉस पिंक के नाम से लोग पुकारते हैं।
सुपरमून शब्द का जिक्र सबसे पहले 1979 में एक एक ज्योतिषी रिचर्ड नोल ने किया था। चंद्रमा अपनी कक्षा में जब पृथ्वी के निकटम बिंदु पर पहुंच जाता है तब सुपरमून नजर आता है।
सुपरमून के बाद 5 जून को चंद्र ग्रहण का नजारा देखने को मिलेगा। ये ग्रहण 5 जून की रात से शुरू होगा जो भारत में भी दिखाई देगा। जून की 21 तारीख को ही सूर्य ग्रहण भी लगेगा।
इस साल, यानी 2020 का अंतिम सुपरमून 7 मई को शाम 4:15 बजे भारत में दिखाई देगा। इस समय उजाला होने की वजह से देश में लोग इसे आकाश में नहीं देख सकेंगे। हालांकि ऑनलाइन इसे आराम से घर बैठे लाइव देखा जा सकेगा।
पारंपरिक रूप से मई पूर्णिमा को दूधिया चंद्रमा यानी मिल्क मून कहा जाता है। वहीं, इस साल इसे सुपर मिल्क मून कहा जाएगा क्योंकि ये पूर्णिमा के दिन दिखाई देने वाला सुपरमून होगा ।
इस वर्ष यह अंतिम सूपर मून है इसलिए इस अवसर को मत छोड़िएगा । चन्द्रमा के पेरीगी स्तिथि में पहुंचने के ठीक 19 घंटे और 45 मिनट के बाद दोपहर 4:15 पर चन्द्रमा की पूर्णिमा की अवस्था आएगी । इसलिए हमें सुपर मून को देखने के लिए गुरुवार की रात का इंतजार करना होगा।
जिस वक्त चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी सबसे कम होती उसी दिन आसमान में सुपरमून नजर आता है। इस दिन चंद्रमा आकार में करीब 14% बड़ा दिखाई देता है और इसकी चमक करीब 30% ज्यादा होती है। नासा के अनुसार, पहला सुपरमून साल 1979 में देखा गया था। एस्ट्रोनॉमर्स ने इसे 'पेरीजीन फुल मून' नाम दिया था।
इस वर्ष यह अंतिम सूपर मून है इसलिए इस अवसर को मत छोड़िएगा । चन्द्रमा के पेरीगी स्तिथि में पहुंचने के ठीक 19 घंटे और 45 मिनट के बाद दोपहर 4:15 पर चन्द्रमा की पूर्णिमा की अवस्था आएगी । इसलिए हमें सुपर मून को देखने के लिए गुरुवार की रात का इंतजार करना होगा।
'ट्रैवल प्लस लीज़र' की रिपोर्ट के मुताबिक सुपरमून का ग्लोबल टाइम सुबह 6 बजकर 45 मिनट बताया जा रहा है। जिसके लिए इसे 'सुपर फ्लावर मून' नाम दिया गया है, क्योंकि यह समय फूलों के खिलने का होता है। नासा के वज्ञानिकों का कहना है कि 'इस बार सुपरमून देखने के लिए लोगों को काफी समय मिलेगा। ये सुपरमून को गुरुवार से लेकर अगले दिन शुक्रवार तक देखा जा सकेगा।
चंद्रोदय और चंद्रास्त के वक्त सुपरमून का नजारा सबसे खास होगा। वहीं भारतीय समयनुसार यह सुपरमून आसमान में शाम को तकरीबन सवा चार बजे दिखना शुरू हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस बार सुपरमून का रंग शुरुआत में थोड़ा गुलाबी रहेगा, फिर संतरी और फिर हल्का पीला हो सकता है।
8 अप्रैल को वर्ष का सबसे बड़ा और चमकीला चंद्रमा दिखाई दिया था। ये सामान्य दिन से 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार था। लेकिन भारतीयसमयानुसार ये सुबह दिखाई दिया था जिस कारण भारत के लोग इस सुपरमून को नहीं देख पाये थे।
एक सुपरमून ऑर्बिट पृथ्वी के सबसे करीब होता है। हमारे ग्रह से ज्यादा नज़दीकी के कारण, चंद्रमा बहुत बड़ा और चमकीला दिखाई देता है। इस महीने का सुपर पिंक मून हमारे ग्रह से 3,56,907 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है और आमतौर पर पृथ्वी और चंद्रमा के बीच औसत दूरी 384,400 किलोमीटर होती है।
2020 का अंतिम सुपरमून 7 मई को शाम 4:15 बजे भारत में दिखाई देगा, इसलिए उजाला होने के कारण देश में लोग इसे आकाश में नहीं देख सकेंगे। हालांकि ऑनलाइन वेबसाइटों पर इसे आराम से घर बैठे लाइव देखा जा सकेगा। Slooh और Virtual Telescope सहित लोकप्रिय यूट्यूब चैनल सुपरमून की लाइवस्ट्रीम की मेजबानी करने के लिए जाने जाते हैं। आने वाले दिनों में उनके YouTube चैनल पर एक लाइव लिंक ज़रूर होना चाहिए।