इस साल 6 ग्रहण पड़े हैं। जिनमें पहला ग्रहण 10 जनवरी को लग चुका है जो चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) था। अब अगला ग्रहण 5 जून को लगेगा ये भी चंद्र ग्रहण होगा। खास बात ये है कि जून में ही सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) भी लगने जा रहा है। ग्रहण एक खगोलीय घटनाक्रम है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तब चंद्र ग्रहण लगता है। इसी तरह जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आता है तब सूर्य ग्रहण लगता है। जानिए इस साल कितने ग्रहण पड़ने वाले हैं…
5 जून को चंद्र ग्रहण: ये साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। जो 5 जून की मध्य रात्रि को 11 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा और 6 जून को 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। ये चंद्रग्रहण भारत, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा।
21 जून को सूर्य ग्रहण: जून में ही सूर्य ग्रहण भी लगेगा। ये 21 जून की सुबह 9 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर दोपहर 03 बजकर 03 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण को भारत, दक्षिण पूर्व यूरोप और एशिया में देखा जाएगा।
5 जुलाई को चंद्र ग्रहण: ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। ये ग्रहण सुबह 08 बजकर 37 मिनट के आस पास से शुरू होगा और 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण को अमेरिका, दक्षिण पूर्व यूरोप और अफ्रीका में देखा जा सकेगा।
30 नवंबर को चंद्र ग्रहण: यह ग्रहण दोपहर 01 बजकर 02 मिनट से शुरू होगा और शाम 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण को भारत, अमेरिका, प्रशांत महासागर, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में देखा जाएगा।
14 दिसंबर को सूर्य ग्रहण: ये ग्रहण शाम 07 बजकर 03 मिनट से शुरू होगा और 03 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसको प्रशांत महासागर, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका में देखा जा सकेगा।
ग्रहण लगने के धार्मिक कारण: पौराणिक कथा अनुसार हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण के पीछे राहु केतु होते हैं। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत पाने को लेकर युद्ध चल रहा था। अमृत को देवताओं को पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और सभी में अमृत बराबर बराबर बांटने के लिए राजी कर लिया। जब मोहिनी का रूप लिए भगवान विष्णु अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर बैठ गया। जिससे अमृत उसे भी मिल जाए।
जैसे ही वो अमृत पीकर हटा, भगवान सूर्य और चंद्रमा को इस बात की भनक हो गई कि वह असुर है और ये बात उन्होंने भगवान विष्णु को बता दी। विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। क्योंकि वो अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं। उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम से जाना गया। ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण राहु केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाते हैं।
