Shardiya Navratri 2022: नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ मंत्र सिद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ विभिन्न मंत्रों का जाप करना महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसे मंत्र और उनका महत्व, जिनका नवरात्रि के दौरान रोजाना जाप करने से हर मनोकामना पूरी हो सकती है और मुक्ति का लक्ष्य भी प्राप्त हो सकता है।
दुर्गा सप्तशती मंत्र और उसका प्रभाव
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का जाप सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसका हर मंत्र अलग-अलग शुभ फल देता है। आइए सबसे पहले दुर्गा सप्तशती मंत्र और उसके लाभों के बारे में जानते हैं।
1- ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।
ज्योतिष के अनुसार इस मंत्र के जप का बड़ा ही महत्व है। इस मंत्र का मतलब यह हुआ कि जयंती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी दुर्गा आपको मैं प्रणाम करता हूं।
2- रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।
ज्योतिष के अनुसार इसका अर्थ यह हुआ कि जब आप संतुष्ट होते हैं तो आप सभी रोगों को नष्ट कर देते हैं, लेकिन जब आप क्रोधित होते हैं तो आप सभी इच्छाओं को नष्ट कर देते हैं। जो तुम्हारी शरण लेते हैं, वे संकट में नहीं पड़ते
3- विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं, विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्।
विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति, विश्वाश्रया ये त्वयि भक्ति नम्रा:॥
4- देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
इसका मतलब यह हुआ कि हे देवी मां मुझे सौभाग्य स्वास्थ्य और परम सुख दो, मुझे रूप दो, मुझे विजय दो, मुझे यश दो और शत्रुओं को परास्त करो।
5- शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हे देवी आप गरीबों और कष्टों के उद्धार के लिए समर्पित हैं, जिन्होंने आपकी शरण ली है। हे देवी नारायणी सभी कष्टों को दूर करने वाली मैं आपको प्रणाम करता हूं।
6- देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
हे देवी, समर्पण करने वालों के कष्टों को दूर करने वाली, दया करो, दया करो, सारे जगत की माता।
मुझ पर दया करो, ब्रह्मांड की देवी, ब्रह्मांड की रक्षा करो, हे सभी गतिमान और गतिहीन प्राणियों की देवी।
