Shani Upay: बहुत से लोग अपने घरों में कुत्ता पालते हैं। कई लोगों को इन्हें पालने का शौक होता है तो कई लोग शौक के साथ-साथ कुछ ज्योतिषी कारणों की वजह से भी इसका पालन करते हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुत्ते का संबंध ग्रहों से होता है। लाल किताब के अनुसार कुत्ता केतु की शुभता के लिए पाला जाता है और ये शनि ग्रह को भी मजबूत करता है। जानिए कुत्ता पालने के और क्या-क्या फायदे हैं और किन बातों का रखना है विशेष ध्यान…

भैरव का सेवक होता है कुत्ता: कुत्ते को भैरव जी का सेवक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कुत्ते को भोजन देने से भैरव प्रसन्न होते हैं और आकस्मिक संकटों से बचाते हैं। मान्यता है कि कुत्ते को प्रसन्न रखने से भैरव भगवान आसपास यमदूत को भी फटकने नहीं देते।

नकारात्मक शक्तियों से बचाता है कुत्ता: ऐसा माना जाता है कि कुत्ता भविष्य में होने वाली घटनाओं को जान लेता है साथ ही आत्माओं को देखने की क्षमता रखता है। इसलिए कुत्ते को देखकर आत्माएं दूर भागने लगती हैं।

शनि और केतु का उपाय: ज्योतिष शास्त्र में काले कुत्ते को पालना सबसे अच्छा माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि काले रंग के कुत्ते पर शनि और केतु दोनों ही ग्रहों का प्रभाव होता है। इसलिए शनि को प्रसन्न करने के लिए काले कुत्ते को पालने के लिए कहा जाता है। कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाने से राहु-केतु के दोषों का निवारण हो जाता है।

संतान सुख के लिए: लाल किताब के अनुसार संतान सुख में बाधा आने पर काला कुत्ता अथवा काला और सफेद रंग का कुत्ता पालने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि यह उपाय संतान के स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद होता है।

कुत्ता पालते समय ध्यान रखने योग्य बातें: कुत्ता पालते समय ध्यान रखना चाहिए कि कुत्ता या तो काला या फिर काला-सफेद रंग का होना चाहिए। उसके नाखुनों की संख्या 22 या उससे अधिक होनी चाहिए। क्योंकि इतने नाखुनों वाले कुत्ते को ही केतु का रूप माना जाता है। शकुन शास्त्र में कुत्ते को शकुन रत्न माना गया है। ऐसा माना जाता है कि काला कुत्ता पालने से रूका हुआ पैसा वापस आने लग जाता है। आर्थिक तंगी दूर हो जाती है।