Shani Gochar 2026: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्यायाधीश का स्थान दिया गया है। शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, वहीं भाग्य के कारक देवगुरु बृहस्पति और कर्म के कारक सूर्य को माना जाता है। इसी कारण वर्ष 2026 में शनि देव और बृहस्पति के गोचर का आपकी कुंडली के किन भावों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह समझना अत्यंत आवश्यक है। यह विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया गया है। आइए जानते हैं शनि किन राशियों की चमका सकते हैं किस्मत….
मकर राशि: साढ़ेसाती से मिलेगी मुक्ति, 2026 में शनि चमकाएंगे सोई हुई किस्मत।
मकर राशि के जातकों के लिए वर्ष 2026 बेहद शुभ और सकारात्मक संकेत लेकर आ रहा है। वर्ष 2025 में शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति मिलने के बाद अब यह नया साल जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और नई शुरुआत का अवसर प्रदान करेगा। वर्तमान में शनि देव आपके लग्न और धन भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव में गोचर कर रहे हैं, जिसे ज्योतिष में अत्यंत अनुकूल स्थिति माना जाता है। तीसरा भाव साहस, परिश्रम, मेहनत और आत्मबल का प्रतीक होता है। इस भाव में स्थित शनि आपके द्वारा किए गए प्रयासों का निष्पक्ष मूल्यांकन करेंगे और उसी के अनुरूप फल प्रदान करेंगे। बीते वर्षों में जिन जातकों ने लगातार संघर्ष किया है, अब उन्हें उसका ठोस और स्थायी परिणाम मिलने लगेगा।
2026 की शुरुआत के साथ ही शनि का प्रभाव धीरे-धीरे मजबूत होता जाएगा, जिससे जीवन में स्थिरता और प्रगति का अनुभव होगा। शनि की दृष्टि पंचम, अष्टम और द्वादश भाव पर रहेगी। पंचम भाव पर प्रभाव से शिक्षा, संतान, रचनात्मक कार्यों और निर्णय क्षमता में मजबूती आएगी। पिछले वर्ष लिए गए फैसलों को इस वर्ष सही दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। संतान, शिक्षा और करियर से जुड़े मामलों में अनुकूल परिणाम देखने को मिलेंगे।
द्वादश भाव पर शनि और गुरु की संयुक्त दृष्टि खर्चों को नियंत्रित करने, निवेश बढ़ाने और विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता के संकेत देती है। पुराने ऋण, कानूनी मामलों और संपत्ति विवादों का समाधान संभव है। राहु के प्रभाव से अचानक धन लाभ, अटका हुआ पैसा मिलने और प्रॉपर्टी से जुड़े मसलों के सुलझने के योग बनते हैं। मेडिकल, कानून, अस्पताल, न्यायपालिका और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा।
नवम भाव पर शनि की दृष्टि से भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा। पिता, गुरु, वरिष्ठ अधिकारी या बॉस का समर्थन और आशीर्वाद मिलेगा। यदि पूर्व में किसी प्रकार का मतभेद रहा है तो उसके समाप्त होने की प्रबल संभावना है। जुलाई के बाद शनि के वक्री होने से धन भाव सक्रिय होगा, जिससे आय में वृद्धि और आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होती जाएगी।
उपाय- अधिक परिश्रम करें और आलस्य को छोड़े। हनुमान जी की आराधना करें। अन्नदान करें और गरीब, जरूरतमंदों की सहायता करें।
कुंभ राशि: धन भाव में शनि और गुरु की कृपा, आर्थिक तंगी होगी दूर।
कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी सिद्ध होने वाला है। इस समय शनि देव आपकी कुंडली के धन भाव में गोचर कर रहे हैं, राहु लग्न में स्थित हैं और देवगुरु बृहस्पति पंचम भाव में विराजमान हैं। 2 जून के बाद गुरु छठे भाव में प्रवेश करेंगे और 18 अक्टूबर से सप्तम भाव में गोचर करेंगे। इस पूरे कालखंड में आय और लाभ का ग्यारहवां भाव विशेष रूप से सक्रिय रहेगा, क्योंकि उस पर शनि और गुरु दोनों की दृष्टि पड़ेगी। इसका सीधा प्रभाव आमदनी बढ़ने और आर्थिक स्थिति के मजबूत होने के रूप में दिखाई देगा।
कुंभ राशि पर चल रही शनि की साढ़ेसाती अब अपने अंतिम चरण में है। ज्योतिष के अनुसार, इस चरण में व्यक्ति को बीते वर्षों की मेहनत और संघर्ष का फल मिलना शुरू हो जाता है। धन भाव में शनि और लाभ भाव पर शनि-गुरु का संयुक्त प्रभाव धन त्रिकोण को सक्रिय कर रहा है, जिससे आय, बचत और संपत्ति में धीरे-धीरे लेकिन स्थिर वृद्धि के योग बन रहे हैं। हालांकि परिणाम उतने ही मिलेंगे, जितनी मेहनत, ईमानदारी और धैर्य आप बनाए रखेंगे।
लग्न में राहु आपकी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाएगा और आपको नए रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। गुरु की कृपा से सही निर्णय लेने, ज्ञान बढ़ाने और अवसर पहचानने में मदद मिलेगी। जुलाई के बाद शनि के वक्री होने पर विदेश, दूरस्थ स्थानों या विदेशी कंपनियों से जुड़े कार्यों में लाभ संभव है। शनि की दृष्टि चतुर्थ भाव पर होने से घर, वाहन और प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में प्रगति होगी, वहीं अष्टम भाव पर दृष्टि अचानक धन लाभ और निवेश से फायदा दिला सकती है।
मीन राशि: साढ़ेसाती का दूसरा चरण, डरें नहीं, शनि देंगे करियर में बड़ी उड़ान
मीन राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, जिसे सामान्यतः लोग डर और कष्ट से जोड़कर देखते हैं। जबकि वास्तव में यह समय जीवन को नई दिशा देने और आत्मविकास का अवसर भी प्रदान करता है। शनि कर्म और न्याय के देवता हैं, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, वहीं देवगुरु बृहस्पति भाग्य, ज्ञान और उन्नति के कारक माने जाते हैं। वर्ष 2026 में शनि और गुरु दोनों का गोचर मीन राशि के लिए अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होगा।
शनि का लग्न भाव में गोचर मानसिक स्थिति, सोच और भावनाओं को प्रभावित करेगा। इस दौरान तनाव और चिंता बढ़ सकती है, लेकिन यही समय आत्मबल, अनुशासन और धैर्य विकसित करने का भी है। जल्दबाजी और भावनात्मक निर्णयों से बचना आवश्यक होगा। वाणी और व्यवहार में संयम रखने से रिश्तों में संतुलन बना रहेगा।
शनि की दृष्टि कर्म भाव पर पड़ने से करियर और कार्यक्षेत्र में मजबूत प्रगति के योग बनते हैं। 2026 में किया गया परिश्रम आने वाले वर्षों में स्थिरता और सफलता दिलाएगा। व्यापार, साझेदारी और रुके हुए कार्यों में भी गति आएगी।
स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना जरूरी होगा। नियमित योग, प्राणायाम और अनुशासित दिनचर्या शनि को अनुकूल बनाएगी। वहीं गुरु का गोचर घर, परिवार, शिक्षा, संतान और भाग्य के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देगा। कुल मिलाकर 2026 मीन राशि के लिए साढ़ेसाती को वरदान में बदलने का वर्ष साबित हो सकता है।
साल 2026 का वार्षिक राशिफल (Horoscope 2026)
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
