रामायण पुराण के अनुसार और त्रेतायुग के उपलब्ध साक्ष्यों अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष 7 फरवरी बुधवार को शबरी जयंती मनाई जाएगी। शबरी को श्री राम का भक्त माना जाता है। श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाकर उनकी भक्ति को पूर्ण किया था। रामभक्त शबरी की भक्ति की कथा रामायण, भागवत, रामचरितमानस, सूरसागर आदि ग्रंथों में मिलती है। शबरी जयंती के पावन अवसर पर शबरी स्मृति यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में श्रीराम के भक्त इकठ्ठे होते हैं।

राम मंदिरों में शबरी की जन्मतिथि के दिन रामायण आदि ग्रंथों का पाठ किया जाता है और विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्रमणा का जन्म शबरी जाति के परिवार में हुआ था और बाल्यकाल से ही श्रमणा भगवान राम की भक्त थीं। श्रमणा को जैसे ही समय मिलता वो भगवान राम की पूजा श्रद्धा के साथ करती थी। श्रमणा का विवाह होने के बाद उनका दुर्भाग्य बढ़ गया क्योंकि उनका पति राक्षसी प्रवृत्ति का था। उसका पति लोगों को परेशान करता था जिस कारण श्रमणा से भी सभी लोग दूर रहते थे।

श्रमणा ने परेशान होकर अपने पति का घर छोड़ दिया और मातंग ऋषि के आश्रम पहुंची। वो एक अछूत वर्ग से थी इस कारण उसे आश्रम में घुसने नहीं दिया। ऋषि मातंग को ये बात पता चली तो वो श्रमणा के पास आए और पूछा कि वो आश्रम में क्यों आना चाहती है, उसने ऋषि को सभी बात बताई। ऋषि उसकी व्यथा सुनने के बाद उसे आश्रम में ले आए। वहां राम भक्ति करके उसका जीवन कटने लगा। वहां वो हर दिन बेर लाती और बेरों को चखकर उसमें से मीठे बेर राम के लिए अलग करके रख लेती कि किसी दिन राम उसके बेर खाएंगे। उसकी ये मुराद पूरी हुई जिस कारण से शबरी का महत्व माना जाता है।