Shab-E-Barat 2026: शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय के लिए काफी महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। इसे माफी की राती के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि  इस्लामिक कैलेंडर के सबसे पवित्र महीनों में से एक ‘शाबान’ जल्द ही आरंभ होने वाले हैं। इसी महीने की 15वीं तारीख को ‘शब-ए-बारात’ मनाई जाती है, जिसे दुनिया भर के मुसलमान समुदाय के लोग माफी की रात या तौबा की रात के रूप में मनाते हैं। मुसलमान इस खास रात को नमाज अदा करने के साथ अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं। इसके साथ ही पूर्वजों की कब्रों के साथ जाकर अपने बुजुर्गों के मगफिरत की दुआ करते हैं। साल 2026 में शब-ए-बारात की तारीख की बात करें, तो 4 या 5 फरवरी की रात को लेकर असमंसज की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं भारत में शब-ए-बारात की सही तारीख, इबादत का वक्त और इस रात का खास महत्व…

शब-ए-बारात 2026 कब है? (Shab-E-Barat 2026 Date)

इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं और 15वीं रात को शब-ए-बारात मनाया जाता है। ये 14 की रात को शुरू होती है और 15 शाबान भोर को समाप्त हो जाती है। ऐसे में इस साल शब-ए-बारात  4 फरवरी 2026 को मनाई जा सकती है। तारीख का सटीक फैसला शाबान का चांद दिखने पर निर्भर करेगा।

शब-ए-बारात की रात मगफिरत की रात

शब-ए-बारात की रात को इस्लाम धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। यह रात माफी और मग़फिरत की रात मानी जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की हर दुआ सुनते हैं और उन्हें माफ़ कर देते हैं। इसके अलावा, शब-ए-बारात के अलावा कुछ और रातें भी विशेष मानी जाती हैं। पहली शुक्रवार की रात दूसरी ईद-उल-फितर से पहले की रात, तीसरी ईद-उल-अधा से पहले की रात चौथी पहली रात रज्जब की रात की दुआ अल्लाह कबूल करते हैं।

शब-ए-बारात मनाने का तरीका

मुस्लिम समुदाय के लोग शब-ए-बारात की रात में खास इबादत करते हैं। वे नमाज़ अदा करते हैं और कुरान पढ़ते हैं, साथ ही अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस दिन और अगले दिन तक कई लोग रोज़ा रखते हैं, जिसे फर्ज नहीं बल्कि नफिल रोज़ा कहा जाता है। इसके अलावा, लोग इस रात को कब्रिस्तान भी जाते हैं और अपने गुजर चुके अपनों की कब्र पर उनकी मग़फिरत की दुआ करते हैं।

शब-ए-बरात और रमजान 2026: इबादत का पाक सिलसिला

शब-ए-बरात का आना इस बात की सबसे बड़ी गवाही है कि बरकतों और रहमतों का महीना ‘रमजान’ अब बेहद करीब है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, शब-ए-बरात (15 शाबान) और पहले रोजे के बीच सिर्फ 15 दिनों का फासला होता है।

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