ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सरकारी नौकरी दिलवाने में शनि की अहम भूमिका होती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कर्म का कारक शनि है। साथ ही कुंडली में नौकरी का मुख्य कारक शनि को मान जाता है। कुंडली में सूर्य दशम भाव या 11 वें भाव में मजबूत स्थिति में हो या कुंडली के पांच महायोग में से कोई दो विद्यमान हों तो सरकारी नौकरी पक्की मानी जाती है।

कुंडली में दशम भाव का स्वामी मजबूत स्थिति में हो और शनि जो कि कर्म और नौकरी का कारक है वो भी मजबूत हो तो ऐसे में सरकारी नौकरी के योग प्रबल होते हैं। इसके अलावा शनि की स्थिति अच्छी हो तो भी सरकारी नौकरी मिलने के अच्छे योग बनते हैं। वहीं मनुष्य की कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिसके कारण जातक को सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है। ज्योतिष के मुताबिक पिता का निरादर करने से सरकारी नौकरी नहीं मिलती। घर की पूर्व दिशा को साफ न रखने के कारण सरकारी नौकरी नहीं मिलती।

साथ ही आलस्य बहुत ज्यादा होने के कारण जातक को सरकारी नौकरी नहीं मिलती है। सही समय पर न सोना और न जागना भी एक सरकारी नौकरी में बाधा उत्पन्न करता है। बड़े भाई को पिता समान माना गया है इसलिए इनका निरादर करने से भी सरकारी नौकरी नहीं मिलती। इसके अलावा कुछ ऐसे ग्रह हैं जो यदि कुंडली में खराब हो तो सरकारी नौकरी से वंचित रह जाता है। जब कुंडली में सूर्य-राहु का ग्रहण दोष हो तो सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती है। साथ ही अगर कुंडली में चंद्रमा और केतु का ग्रहण दोष बनता हो तो ऐसे में भी सरकारी नौकरी दूर की कौड़ी होती है। इसके अलावा कुंडली का दशम भाव, छ्ठा भाव या एकादश भाव का स्वामी अच्छे हालात में न हो तो व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए सपने में भी नहीं सोच सकता है।