Ganadhipa Sankashti Chaturthi Aarti: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत बेहद खास माना जाता है। हर माह में दो बार चतुर्थी तिथि आती है, एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में। संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन की सारी परेशानियां दूर हो सकती हैं। वहीं वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस बार गणाधिप संकष्टी चतुर्थी तिथि आज यानी 19 नवबंर को किया जाएगा। ऐसे में इस दिन अगर आप चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद गणपति बप्पा की आरती की जाए तो इससे आपको बहुत लाभ मिल सकता है। यहां पढ़ें गणेश जी की पूरी आरती और मंत्र।
गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
गणेश जी के मंत्र (Ganesh Ji Mantra)
ॐ गं गणपतये नमः
गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा
ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।
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