Sakat Chauth 2026 Aarti: हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार यह व्रत हर वर्ष माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति के लिए निर्जला व्रत करती हैं। व्रत के दौरान सकट माता और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की आराधना करने से संतान से जुड़े कष्ट, भय और बाधाएं दूर होती हैं। रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। सकट चौथ को ‘तिलकुट चतुर्थी’ भी कहते हैं। भगवान गणेश को इस दिन तिल और गुड़ से बने ‘तिलकुट’ का भोग अवश्य लगाएं, इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। सकट चौथ पर विशेष आरती और मंत्रों का जाप करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं सकट चौथ पर कौन-सी आरती और मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है…
सकट चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त (Sakat Chauth 2026 Muhurat)
लाभ – उन्नति – 11:09 AM से 12:27 PM
अमृत – सर्वोत्तम – 12:27 PM से 01:45 PM
शुभ – उत्तम – 03:03 PM से 04:21 PM
लाभ – उन्नति – 07:21 PM से 09:03 PM
सकट चौथ पर चंद्रोदय का समय (Sakat Chauth 2026 Moonrise Time)
इस दिन चंद्रोदय रात 09 बजकर 7 मिनट पर होगा। ऐसे में चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।
सकट चौथ माता की आरती (Sakat Chauth Mata Ki Aarti)
ओम जय श्री चौथ मैया, बोलो जय श्री चौथ मैया
सच्चे मन से सुमिरे, सब दुःख दूर भया
ओम जय श्री चौथ मैया
ऊंचे पर्वत मंदिर, शोभा अति भारी
देखत रूप मनोहर, असुरन भयकारी
ओम जय श्री चौथ मैया
महासिंगार सुहावन, ऊपर छत्र फिरे
सिंह की सवारी सोहे, कर में खड्ग धरे
ओम जय श्री चौथ मैया
बाजत नौबत द्वारे, अरु मृदंग डैरु
चौसठ जोगन नाचत, नृत्य करे भैरू
ओम जय श्री चौथ मैया
बड़े बड़े बलशाली, तेरा ध्यान धरे
ऋषि मुनि नर देवा, चरणो आन पड़े
ओम जय श्री चौथ मैया
चौथ माता की आरती, जो कोई सुहगन गावे
बढ़त सुहाग की लाली, सुख सम्पति पावे
ओम जय श्री चौथ मैया।
श्री गणेश जी की आरती | Shree Ganesh Aarti Lyrics in Hindi
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय, ओम गं गणपतये नमः
गणेशजी की आरती के बाद करें गणेश वंदना
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि,
मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ।
गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ।
