रमजान का पाक महीना चल रहा है जो अगले 04 जून 2019 तक चलेगा। आज यानि 10 मई, शुक्रवार को रमजान का पहला जुम्मा है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार हर मुसलमान के लिए जुम्मे का नमाज जरूरी है। साथ ही रमजान के दौरान पड़ने वाले जुम्मे की नमाज को तो और भी अधिक अहमियत दी गई है। इन सब के बीच क्या आप जानते हैं कि जुम्मे की नमाज हर मुसलमान के लिए क्यों खास है? साथ ही रमजान के दौरान पड़ने वाले का इस्लाम धर्म में क्या अहमियत है? यदि नहीं तो आगे इसे जानते हैं।
दरअसल इस्लाम के अनुसार हर रोज पांच बार नमाज अदा करना जरूरी होत है। परंतु जो लोग रोज नमाज नहीं कर पाते उनके लिए खासकर शुक्रवार का दिन बनाया गया है। वैसे इस बात में कोई दो राय नहीं है कि इस्लाम धर्म को मानने वाले चाहे भोजन भूल जाए लेकिन अल्लाह को याद करना कभी नहीं भूलते। खासतौर से शुक्रवार के दिन। यूं तो हर दिन अल्लाह को याद करने का है। ऐसे में शुक्रवार की नमाज इतना खास क्यों है? सामान्य तौर पर इसे इस्लाम धर्म में जुम्मे का नमाज कहा जाता है। जिसके अनुसार इस दिन सभी मुसलमानों को एकत्र होकर अल्लाह का नाम लेना होता है।
दरअसल आपको बता दें कि जामा मस्जिद का नाम जुम्मा के नाम पर ही रखा गया है। जिसके अनुसार यह वह स्थान है जहां जुम्मे के दिन एकत्रित होकर नमाज पढ़ते हैं। साथ ही एक-दूसरे से मिलकर अपनी जिंदगी की परेशानियों का हल निकालते हैं और एक-दूसरे के प्रति अपने रिश्ते को कायम रखते हैं। इसलिए इस्लाम में ऐसा कहा जाता है कि अल्लाह के इबादत के साथ ही शुक्रवार का दिन भाईचारे को समर्पित है। कहते हैं कि इस दिन मस्जिदों में ईमाम वहां मौजूद लोगों को जीवन का संदेश देते हैं। साथ ही कठिनाइयों से लड़ने के लिए कुरान में दर्ज उपदेश बताते हैं। वहीं इस्लाम में जुम्मे को अल्लाह के दरबार में रहम का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नमाज पढ़ने वाले इंसान के पूरे हफ्ते की गलतियों को अल्लाह माफ करते हैं। साथ ही उसे आने वाले दिनों में एक अच्छा जीवन जीने का संदेश देते हैं।
