Bengali New Year (Poila Baisakh) 2020 Date: बंगाली नववर्ष साल 2020 में 14 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। बंगाल में इसे पोइला बोइशाख कहा जाता है। ये वैशाख माह का पहला दिन होता है। इस दौरान बंगाली लोग एक दूसरे को शुभो नोबो बोरसो बोलकर नए साल की शुभकामनाएं देते हैं। शुभो नोबो बरसो का मतलब है नए साल की मुबारक। मान्यताओं अनुसार बंगाल में वैशाख महीना काफी शुभ माना जाता है।

पोइला बोइशाख के दिन लोग अपने घरों को साफ करते हैं। पूजा पाठ की जाती है। इस दिन व्यापारी नया लेखा-जोखा की शुरुआत करते हैं। सुबह पूजा करने के बाद घर घर पकवान बनाए जाते हैं। बंगाल में इस दिन परिवार की समृद्धि और भलाई के लिए पूजा की जाती है। इस दिन घर सजाना, मंदिर जाना, बड़ों का आशीष लेने की परंपरा है। पोइला बोइशाख में गावों में आज भी मां भगवती की पूजा की जाती है। भगवती यानी गौ माता। सुबह गौ माता को स्नान कराकर उन्हें तिलक लगाया जाता है। उसके बाद गाय को भोग लगाकर उनका पांव छूकर आशीर्वाद लिया जाता है।

गांव में गोष्ठी मेलों का आयोजन किया जाता है। पीली साड़ी में महिलाएं और पायजामा या धोती कुर्ता में पुरुष शाम के समय इस मेले में शरीक होते हैं। लोग अपने घरों से राधा-कृष्ण की मूर्ति को लेकर गोष्ठी मंडप पर पहुंचते हैं। फिर एकसाथ पूजा की जाती है। भजन कीर्तन किये जाते हैं। बांग्ला नववर्ष की सुबह पुआल जलाने का भी रिवाज है। लोग इस पुआल में अपने गुजरे साल के तमाम कष्टों की आहुति देते हैं। माना जाता है कि इससे पूरे साल खुशहाली बनी रहती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूर्य को देखने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करना शुभ होता है। बंगाली लोग इस दौरान पारंपरिक कपड़ों में सजे धजे नजर आते हैं। सुबह-सुबह लोग नाश्ते में प्याज, हरी मिर्ची और फ्राईड हिल्सा फिश के साथ पान्ता भात करते हैं। बंगाली इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। अच्छी बारिश के लिए बादलों की भी पूजा की जाती है।

पोहेला बोइशाख मूहूर्त:
बंगाली युग 1427 प्रारम्भ
पोहेला बोइशाख मंगलवार, अप्रैल 14, 2020 को