Shradh Paksh 2020: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2020) के 15 दिनों को बहुत पावन माना जाता हैं। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान सभी परिवारों के पितृ देव उनके घर लौट कर आते हैं। इसलिए ही इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण करते हैं ताकि उनके पितरों की तृप्ति हो सके। कहते हैं कि जो इस दौरान अपने पितरों को संतुष्ट करता है, उसके घर के पितृ उस पर कृपा बरसाते हैं। पितृपक्ष के दौरान जो लोग अपने पितरों के लिए श्रद्धा से तर्पण करते हैं उन्हें पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
आचार्यों का मानना है कि पितरों की कृपा के बिना घर में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है और ना ही घर में पुत्र प्राप्ति होती है। अगर किसी के घर में पितृ दोष लगा होता है तो उसके घर में फूल-पौधे भी नहीं उगते हैं इसलिए पितरों को प्रसन्न करना बहुत जरूरी है। मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से अपने पितरों के लिए तर्पण या दान आदि करता है तो उसे अपने पितरों की कृपा जरूर मिलती है। जानिये पितृपक्ष के दौरान किन चीजों का दान (Pitru Paksha Daan) होता है उत्तम –
पितृपक्ष के दौरान उड़द की दाल दान करना अच्छा होता है। माना जाता है कि पितरों को उड़द की दाल से संतुष्टि मिलती है। इसलिए ही पिंडदान के दौरान उड़द की दाल का इस्तेमाल किया जाता है।
श्राद्ध के दिनों में साल में एक बार पितर तृप्त होने के लिए धरती पर आते हैं। ऐसे में जल के दान को बहुत अच्छा माना जाता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति सच्चे मन से अपने पितरों को तृप्त करने के लिए जल का दान करता है उसे अनेकों गुणा पुण्य की प्राप्ति होती है।
पितृपक्ष के दौरान कपड़ों का दान करना चाहिए। कपड़ों का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को किया जा सकता है। कहते हैं कि पितृपक्ष के दौरान दान उन्हें भी दे सकते हैं। जिनमें आप अपने पितरों की छवि देखते हों।
जो व्यक्ति इन 15 दिनों में भोजन का दान करता है उसके पितृ देव उससे प्रसन्न हो जाते हैं। कहते हैं कि पितरों को भोजन खाना नहीं होता है, वह केवल उसकी खुशबू और जिस भाव से उस भोजन को बनाया गया है, उसे ग्रहण करते हैं।
पितरों के लिए पितृ पक्ष में रोशनी दान करनी चाहिए। यहां रोशनी का मतलब दीपक, लाइट, बल्ब, टॉर्च, मोमबत्ती या ट्यूबलाइट आदि दान करने से हैं। कहते हैं कि रोशनी दान करने से पितृ देव को अपने लोक में जाने का रास्ता दिखता है।
जिनके पितरों को मृत्यु से पहले चलने में दिक्कत होती थी, वह लोग अपने पितरों के निमित्त लाठी भी दान करते हैं ताकि उनके पितृ देव को दूसरे लोक में चलने में परेशानी ना हो।
