परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। इस दिन अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) का पावन पर्व भी मनाया जाता है। तृतीया तिथि की शुरुआत 25 अप्रैल की सुबह 11 बजकर 51 मिनट से होने जा रही है। माना जाता है कि भगवान परशुराम का जन्म इसी तिथि को प्रदोष काल में हुआ था। इसी कारण जिस दिन वैशाख तृतीया तिथि प्रदोष काल में व्यापत होती है उसी दिन भगवान परशुराम का जन्मदिवस मनाया जाता है। 25 तारीख से ही रमजान (Ramadan) शुरू होने की उम्मीद भी है। जानिए भगवान परशुराम के जीवन से जुड़ी दिलचस्प बातें…
परशुराम जयंती: क्षत्रिय विरोधी नहीं थे परशुराम, 21 अत्याचारी राजाओं का किया था समूल विनाश
– भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। मान्यता है कि ये चिरंजीवी हैं और आज भी धरती पर मौजूद हैं।
– भगवान परशुराम काफी क्रोधी स्वभाव के माने जाते थे। उनके क्रोध का सामना एक बार भगवान गणेश को भी करना पड़ा था। गणेश जी ने एक बार परशुराम जी को कैलाश जाने से रोक दिया था जिससे क्रोधित होकर परशुराम जी ने गणेशजी का एक दांत काट डाला था।
– भगवान राम और परशुराम की मुलाकात तब हुई जब राम जी ने सीता स्वयंवर के समय भगवान शिव के धनुष को भंग कर दिया था जिससे क्रोधित होकर भगवान परशुराम श्रीराम का वध करने की सोची। लेकिन जब भगवान विष्णु के शारंग धनुष से भगवान राम ने बाण का संधान कर दिया तो परशुरामजी ने भगवान राम की वास्तविकता को जान लिया और आशीर्वाद देकर चले गए।
– भगवान परशुराम की मौजूदगी के बारे में सतयुग से लेकर द्वापर युग तक में कथा मिलती है। भगवान राम ने उन्हें अपना सुदर्शन चक्र भेंट किया था जिसे द्वापर युग में परशुरामजी ने भगवान श्रीकृष्ण को सौंप दिया था।
– भगवान परशुराम माता रेणुका और ॠषि जमदग्नि की चौथी संतान थे। पिता की आज्ञा के बाद परशुराम जी ने अपनी ही मां का वध कर दिया था। जिसकी वजह से उन्हें मातृ हत्या का पाप भी लगा। इस पाप से मुक्ति के लिए इन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या भी की। भगवान शिव ने परशुराम को मृत्युलोक के कल्याणार्थ परशु अस्त्र प्रदान किया, यही वजह थी कि वो बाद में परशुराम कहलाए।
– ऐसा माना जाता है कि परशुराम जी ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था। ऐसा उन्होंने अपने माता पिता के अपमान का बदला लेने के लिए किया था।

