Narasimha Jayanti 2019: भगवान के जीतने स्वरूप हैं उतनी ही उनकी महिमा है। परंतु उन सभी में भगवान नृसिंह (नरसिंह) का सबसे अद्भुत रूप है। श्रीहरि ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह का रूप धारण किया था। कहते हैं नृसिंह जयंती पर भगवान के इस रूप की उपासना से सभी मनोकामना पूरी होती हैं। भगवान नृसिंह, श्रीहरि विष्णु के पांचवे अवतार माने जाते हैं।
साल 2019 में भगवान नृसिंह की जयंती 17 मई को यानि आज मनाई जा रही है। भगवान नृसिंह, श्रीहरि विष्णु के उग्र और शक्तिशाली अवतार माने जाते हैं। इनकी उपासना करने से हर प्रकार के संकट और दुर्घटना से रक्षा होती है। साथ ही हर प्रकार के मुकदमे, विवाद, शत्रु और विरोधी शांत होते हैं। इसके अलावा इनकी उपासना करने से तंत्र-मंत्र की बाधाएं भी खत्म होती हैं।
नृसिंह अवतार की महिमा
अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था। इनका प्राकट्य खम्बे से गोधूली वेला के समय हुआ था। भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। पुराणों में नरसिंह अवतार की जो कथा आती है उसके अनुसार दैत्यों का राजा हिरण्यकशिपु खुद को भगवान से भी अधिक बलवान समझता था। उसे मनुष्य, देवता, पक्षी, पशु, न दिन में, न रात में, न धरती पर, न आकाश में, न अस्त्र से, न शस्त्र से मरने का वरदान प्राप्त था। उसके शासन में जो भी भगवान विष्णु की पूजा करता था उसे दंड दिया जाता था। उसके पुत्र का नाम प्रह्लाद था।
प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था। यह बात जब हिरण्यकशिपु का पता चली तो वह बहुत क्रोधित हुआ और प्रह्लाद को समझाने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी जब प्रह्लाद नहीं माना तो हिरण्यकशिपु ने उसे मृत्युदंड दे दिया। कहते हैं कि वह हर बार भगवान विष्णु के चमत्कार से बच गया। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, वह प्रह्लाद को लेकर धधकती हुई अग्नि में बैठ गई। तब भी भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। जब हिरण्यकशिपु प्रह्लाद को मारने ही वाला था तब भगवान विष्णु नृसिंह का अवतार लेकर खंबे से प्रकट हुए और उन्होंने अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया।
