Ekadasi 2020 In May: वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी व्रत रखा जाता है। इस बार ये व्रत 3 मई को रखा जायेगा। इस दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को बचाने के लिए मोहिनी रूप लिया था। कहा जाता है कि इस दिन उपवास रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है। जानिए मोहिनी एकादशी व्रत पूजा का मुहूर्त, कथा और महत्व…

मोहिनी एकादशी मुहूर्त (Mohini Ekadashi Muhurat):

एकादशी तिथि प्रारम्भ – मई 03, 2020 को 09:09 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – मई 04, 2020 को 06:12 ए एम बजे
4 मई को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:13 पी एम से 03:50 पी एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 11:22 ए एम

मोहिनी एकादशी का महत्व (Mohini Ekadashi Katha): किसी समय में भद्रावती नामक एक बहुत ही सुंदर नगर हुआ करता था। जहां पर धृतमान नामक राजा राज किया करता था। राजा बहुत ही पून्यात्मा थे। उनके राज में प्रजा भी धार्मिक कार्यों में बड चड कर भाग लेती थी। इसी नगर में धनपाल नाम का वैश्य भी रहता था। धनपाल भगवान विष्णु के परम भक्त और पून्यकारी सेठ थे। भगवान विष्णु की कृपा से इनकी पांच संतानें थी। इनके सबसे छोटे पुत्र का नाम धृष्टबुद्धि था। उसका यह नाम उसके धृष्ट कर्मों के वजह से पड़ा था। बाकी चार पुत्र पिता की तरह नेक थे, लेकिन धृष्टबुद्धि कोई ऐसा पापकरण नहीं छोडा जिसने नहीं किया हो। अंत में तंग आकर पिता ने उसे बेदखल कर दिया और भाईयों ने भी ऐसे पापी भाई से नाता तोड़ लिया। जो धृष्टबुद्धि पिता और भाईयों की कमाई पर मजे करता था वह दर-दर की ठोकरें खाने लगा। ऐसोआराम तो दूर खाने के लाले पड़ गए।

किसी पूर्वजन्म के पून्यकर्म रहे होंगे कि जिससे वह भटकते भटकते कौंडिल्य ऋषि के आश्रम में पहुंच गया। वह आश्रम में जाकर महर्षि के चरणों में जाकर गिर गया। पश्चताप की अग्नि में जलते हुए वह कुछ कुछ पवित्र भी होने लगा था। महर्षि को अपनी पूरी व्यथा बताई और पश्चाताप का उपाय जानना चाह। उस समय महर्षि शरणागत का मार्गदर्शन अवश्य किया करते थे और पाठक को मोक्ष की प्राप्त की उपाय बता दिया करते थे। ऋषि ने कहा कि वैशाख शुक्ल की एकादशी को पून्य फलदायी होती है और इसका उपवास करों, तुम्हें जरूर मुक्ति मिलेगी। धृष्ठबुद्धि ने महर्षि की बताई विधि अनुसार वैशाख शुक्ल एकादशी यानी मोहिनी एकादशी का उपवास किया। इसके बाद धृष्ठबुद्धि को पाप कर्मों से छुटकारा मिला और मोक्ष की प्राप्ति हुई।